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भुवनेश्वर, 18 मई। सोमवार को तपतपाती धूप में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर की सड़कों पर मजदूरों का हुजुम उमड़ पड़ा। 15 हजार से अधिक की संख्या में सड़क पर उतरे ये ठेका मजूदर छंटनी का विरोध कर रहे थे। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले यह विरोध प्रदर्शन किया गया।

भारतीय मजदूर संघ, ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष बादल महाराना ने बताया कि विद्युत, खदान, स्टील विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी, हस्पताल, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, सफ़ाई इत्यादि कार्यों में नियोजित कर्मचारियों का गुस्सा छंटनी को लेकर फूट पड़ा है।

भारतीय मजदूर संघ सामूहिक छंटनी को विरोध कर रहा है। सबसे अधिक छंटनी विद्युत क्षेत्र में हुई है। छंटनी किए गए कर्मचारियों की पुनः नियुक्ति सहित वेज कोर्ड के तहत वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान मांग करने की मांग को लेकर ओडिशा विधानसभा के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन भी किया जा रहा है। ओडिशा विद्युत नियामक आयोग के एक गैर जिम्मेदाराना पत्र को अस्त्र बनाकर टाटा पावर द्वारा बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है। भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में ओडिशा में कार्यरत अनुबंध कर्मचारी अपनी मांगें पूरी होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

बादल महाराना ने कहा कि राज्य में सरकार बदलने के बाद हालात नहीं बदले हैं। गैर- ओडिया लोगों की नियुक्ति हर क्षेत्र में बढ़ रही है। ओडिशा के लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है पिछले दो वर्षों में ओडिशा में 15,000 से अधिक श्रमिकों ने अपनी नौकरी खो दी है। जिसने भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, उसे नौकरी से निकाल दिया गया। श्रम विभाग की निष्क्रियता और अक्षमता के कारण राज्य सरकार के विभिन्न विभागों जैसे बिजली, अस्पताल, खदान, इस्पात, जल आपूर्ति, बंदरगाह, निर्माण में अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है और भविष्य में कई और श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

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भारतीय मजदूर संघ, ओडिशा के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि हर बिजली सेक्शन में 600 से 1 हजार छोटे-बड़े ट्रांसफार्मर हैं, जबकि पेट्रोलिंग गाड़ियां एक-दो काम कर रही हैं। कुछ सेक्शन में तो अगर एक बार लाइन कट जाती है तो उसे ठीक होने में एक-दो दिन लग जाते हैं क्योंकि लोगों ने बिजली की समस्या के बारे में बिजली विभाग से शिकायत नहीं करते है या कर नहीं रहे हैं। असलियत यह है कि सभी घनी आबादी वाले सेक्शन में, जरूरत के हिसाब से ज्यादा टेक्निकल और पढ़े-लिखे कर्मचारियों को रखने के बजाय, टाटा पावर, कर्मचारी छंटनी करके परिवार उजाड़ रही है। ठेकेदार और राजनेताओं को अमीर बनाने की साजिश की जा रही है। बिजली मंत्री सिंहदेव का टाटा पावर के ऊपर कोई कंट्रोल नहीं है, वे राजनीतिक मकसद से कंपनी के साथ सांठ गांठ कर रहे हैं।

ओडिशा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन प्रदीप जेना पिछली सरकार के एक भ्रष्ट अधिकारी हैं जो हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में शामिल हैं। प्रदीप जेना की वजह से हजारों बिजली आउटसोर्सिंग कर्मचारी सड़कों पर हैं।

हर जगहों, खदानों से लेकर स्पंज आयरन सीमेंट, हॉस्पिटल, सफ़ाई बंदरगाहों में सरकारी विभागों में वर्षों ओडिशा के लोग स्थाई प्राकृति कार्यों में कॉन्ट्रैक्चुअल/आउटसोर्सिंग पर काम करते आ रहे थे। 10 साल ऊपर काम करने वालों को सरकार उस जगहों स्थाई नियुक्ति देने का बजाए छंटनी कर रही है। आधुनिकरण के नाम पर श्रमिकों का शोषण करना, केंद्रीय संगठनों से वार्ता नहीं करना, यह अच्छा संकेत नहीं है।

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