नई दिल्ली, 2 जुलाई। देश में कोयले के आयात में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। कोयला मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत का कुल कोयला आयात (coal import) 12.95 प्रतिशत घटकर 21.13 मिलियन टन (MT) रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 24.27 मिलियन टन था। यानी एक वर्ष में 3.14 मिलियन टन की कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय ने इसे घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने और आयात के विकल्प (Import Substitution) को बढ़ावा देने की नीति का सकारात्मक परिणाम बताया है।
बिजली क्षेत्र में आयात में सबसे बड़ी कमी
घरेलू कोयले की बेहतर उपलब्धता के कारण बिजली संयंत्रों द्वारा आयातित कोयले पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। विद्युत क्षेत्र के लिए कोयले का आयात 24.89 प्रतिशत घटकर 4.67 मिलियन टन से 3.51 मिलियन टन रह गया।
विशेष रूप से आयातित कोयले पर आधारित (Imported Coal-Based – ICB) बिजली संयंत्रों के लिए आयात में 27.45 प्रतिशत की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इन संयंत्रों का आयात 3.97 मिलियन टन से घटकर 2.88 मिलियन टन रह गया।
वहीं, घरेलू कोयला आधारित (Domestic Coal-Based – DCB) संयंत्रों द्वारा मिश्रण (Blending) के लिए आयातित कोयले की खरीद भी 11.26 प्रतिशत घटकर 0.71 मिलियन टन से 0.63 मिलियन टन रह गई। यह दर्शाता है कि घरेलू आपूर्ति में सुधार के कारण ब्लेंडिंग के लिए आयातित कोयले की आवश्यकता लगातार कम हो रही है।
कुल खपत में आयात की हिस्सेदारी भी घटी
देश की कुल कोयला खपत में आयातित कोयले की हिस्सेदारी भी कम हुई है। अप्रैल 2025 में जहां कुल खपत में आयात का हिस्सा 21.69 प्रतिशत था, वहीं अप्रैल 2026 में यह घटकर 19.68 प्रतिशत रह गया। यह दो प्रतिशत से अधिक की उल्लेखनीय गिरावट है और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कोकिंग कोयले का आयात लगभग स्थिर
हालांकि, इस्पात उद्योग की आवश्यकताओं को देखते हुए कोकिंग कोयले के आयात में 1.34 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई। इसका आयात 5.93 मिलियन टन से बढ़कर 6.01 मिलियन टन हो गया। मंत्रालय के अनुसार, भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले के सीमित भंडार होने के कारण इस्पात उद्योग अभी भी आयात पर निर्भर है।
मंत्रालय ने बताया सफलता का आधार
कोयला मंत्रालय ने कहा कि आयात में आई यह गिरावट घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) परियोजनाओं को गति देने, तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयला स्टॉक की नियमित निगरानी तथा कोयला मंत्रालय, रेल मंत्रालय, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी सहायक कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है।
मंत्रालय ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी घरेलू उत्पादन, कोयला परिवहन अवसंरचना और गुणवत्ता आधारित ग्रेडिंग प्रणाली को और मजबूत कर आयात पर निर्भरता को लगातार कम किया जाएगा। साथ ही देश के तापीय बिजली संयंत्रों को पर्याप्त घरेलू कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रहेंगे।
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