रायपुर, 8 जुलाई (IndustrialPunch Desk) : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा NTPC सहित केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जाने वाली बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए वर्तमान त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite Agreement) की जगह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (Direct Debit Mandate-DDM) व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
राज्य सरकार का मानना है कि यह निर्णय बिजली क्षेत्र में भुगतान प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाएगा। साथ ही केंद्रीय बिजली कंपनियों को भुगतान में होने वाली संभावित देरी की आशंका भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
क्या है Direct Debit Mandate (DDM)?
Direct Debit Mandate (DDM) ऐसी बैंकिंग व्यवस्था है, जिसके तहत निर्धारित तिथि पर संबंधित कंपनी के बैंक खाते से बिजली खरीद का भुगतान स्वचालित रूप से हो जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया RBI के बैंकिंग मानकों के अनुरूप होगी, जिससे भुगतान में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
अब तक यह व्यवस्था Tripartite Agreement के माध्यम से संचालित होती थी, जिसमें राज्य सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच भुगतान सुरक्षा का प्रावधान था। नई व्यवस्था में भुगतान प्रणाली को और अधिक सरल एवं आधुनिक बनाया जाएगा।
NTPC सहित CPSUs को मिलेगा बड़ा भरोसा
छत्तीसगढ़ अपनी बिजली आवश्यकता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा NTPC तथा अन्य केंद्रीय विद्युत उपक्रमों से खरीदता है। समय पर भुगतान सुनिश्चित होने से इन कंपनियों का राज्य वितरण कंपनी पर भरोसा और मजबूत होगा तथा भविष्य में बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा की संभावना कम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिजली खरीद व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाएगा और दीर्घकालिक विद्युत आपूर्ति अनुबंधों के संचालन में भी सहायक होगा।
राज्य पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त वित्तीय भार
कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि इस नई व्यवस्था से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। वितरण कंपनी पहले की तरह बिजली खरीद का भुगतान करती रहेगी। केवल भुगतान की सुरक्षा प्रणाली को RBI के वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपडेट किया जा रहा है।
यदि किसी परिस्थिति में आवश्यकता हुई तो लेटर ऑफ क्रेडिट (Letter of Credit-LC) की व्यवस्था भी पहले की तरह प्रभावी रहेगी। इससे भुगतान सुरक्षा का अतिरिक्त विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
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