कोलकाता। सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी Coal India Limited (CIL) ने देश की कोयला खदानों की निगरानी को तकनीकी रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के National Remote Sensing Centre (NRSC) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत Coal India के सभी कोयला क्षेत्रों की निगरानी के लिए सैटेलाइट आधारित जियोस्पेशियल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा।
यह समझौता हैदराबाद स्थित NRSC में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऑनलाइन हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर Coal India के निदेशक (तकनीकी) अच्युत घटक और NRSC के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान मौजूद रहे। Coal India की टीम ने कोलकाता स्थित कॉर्पोरेट मुख्यालय से कार्यक्रम में भाग लिया।
प्रस्तावित जियोस्पेशियल डैशबोर्ड को CMPDI द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले माइन ब्लॉक सीमा (Mine Block Boundary) डेटा के आधार पर विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से Coal India और उसकी सहायक कंपनियों की खदानों में माइन क्लोजर, वनीकरण एवं हरित आवरण (Afforestation & Green Cover), पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (Rehabilitation & Resettlement – R&R) तथा लीज क्षेत्र के बाहर होने वाली खनन गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी।
डैशबोर्ड की एक महत्वपूर्ण विशेषता झरिया कोलफील्ड में कोयला आग (Coal Fire) की मैपिंग और आग के संभावित प्रसार (Fire Propagation) का पूर्वानुमान भी होगी। इससे आग प्रभावित क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर प्रभावी रोकथाम और सुरक्षा उपाय लागू करने में मदद मिलेगी।
Coal India और NRSC इस परियोजना में Artificial Intelligence (AI), Machine Learning (ML), Deep Learning तथा Predictive Analytics जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करेंगे। यह प्रणाली Bhuvan Analytical Dashboard प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जिसके माध्यम से कोयला आग की पहचान, उसके फैलाव का पूर्वानुमान, भूमि उपयोग में बदलाव (Change Detection) और अन्य जियोस्पेशियल विश्लेषण किए जा सकेंगे।
Coal India का मानना है कि यह पहल डिजिटल माइनिंग, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक खनन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। सैटेलाइट तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय से खनन गतिविधियों की निगरानी अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी होगी, जिससे सतत एवं सुरक्षित खनन को बढ़ावा मिलेगा।









