GST Council MEET: राज्यों को RBI से कर्ज लेने का दिया गया विकल्प, मीटिंग में ये फैसले लिए गए

नई दिल्ली। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जीएसटी काउंसिल के 41वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और केंद्र सरकार और राज्यों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण इस वित्त वर्ष में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) में भारी कमी आई है। इसे देखते हुए इस बैठक का एकमात्र एजेंडा राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई करना है।

जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के चलते जीएसटी से टैक्स कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वित्त मंत्री ने कहा कि या तो केंद्र सरकार खुद उधार लेकर राज्यों को जीएसटी मुआवजा (GST Compensation) दे या फिर राज्य सरकारें खुद RBI से कर्ज ले। राज्यों को 7 दिनों के भीतर अपनी राय देनी है। यानी सात दिन के बाद एक फिर GST काउंसिल की संक्षिप्त बैठक होगी। हालांकि, राज्यों को यह विकल्प सिर्फ इसी साल के लिए दिया गया है। GST काउंसिल अप्रैल 2021 में फिर बैठेगा और हालात की समीक्षा करेगा।  वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा कि कोरोना की वजह से चालू वित्त वर्ष (2020-21) में जीएसटी कलेक्शन में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी आने की आशंका है।

इन विकल्पों पर किया गया विचार

वित्त मंत्री ने बताया कि पांच घंटे तक चली बैठक में राज्यों को 2 विकल्प दिए गए हैं। बैठक में जीएसटी कलेक्शन की भरपाई के लिए जिन विकल्पों पर विचार किया, उनमें राज्यों द्वारा बाजार से कर्ज लेना या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से कर्ज लेने का विकल्प शामिल है। केंद्र ने राज्यों से राजस्व में कमी की भरपाई के लिए बाजार से कर्ज लेने को कहा है। लेकिन केंद्र के इस कदम का विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों ने विरोध किया है। सीतारमण ने कहा कि जो राज्य खुद उधार लेंगे, उन्हें आत्मनिर्भर भारत योजना के मुताबिक Fiscal Responsibility and Budget Management Act (FRBM) के तहत कर्ज लेने में 0.5% की छूट मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। हम इस बारे में RBI से बात कर रहे हैं। लोन की किश्त और पेमेंट पर राज्यों द्वारा फैसला लेने के बाद निर्णय लिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि टू व्हीलर्स के मुद्दे पर GST काउंसिल में आगे चर्चा होगी।

जीएसटी मुआवजे के लिए 1.65 लाख करोड़ रुपये जारी

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को बकाया जीएसटी मुआवजे (GST Compensation) के 1.65 लाख करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। 2019-20 के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि ट्रांसफर न किए जाने का कई गैर-बीजेपी शासित राज्यों ने विरोध किया था। केंद्र सरकार ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस के तौर पर सिर्फ 95,444 करोड़ रुपये ही आए हैं, इसके बाद भी केंद्र ने 1.65 लाख करोड़ रुपये की पूरी राशि जारी कर दी है। इसमें मार्च महीने के 13,806 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। वहीं, वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा कि जीएसटी मुआवजा कानून के अनुसार, राज्यों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। हालांकि, अटार्नी जनरल ने कहा कि जुलाई, 2017 से जून, 2022 के ट्रांजिशन पीरियड के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाना है। लेकिन, जीएसटी कलेक्शन में कमी को भारत के एकीकृत फंड (Consolidated Fund of India) से पूरा नहीं किया जा सकता है।
अप्रैल 2021 में होगी समीक्षा

वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा कि अप्रैल-जुलाई 2020 के दौरान कुल जीएसटी मुआवजा 1.5 लाख करोड़ रुपये रहा, क्योंकि अप्रैल और मई में जीएसटी संग्रह नहीं हो पाया था। सचिव ने कहा, एक बार GST काउंसिल द्वारा व्यवस्था पर सहमति हो जाने के बाद हम बकाया राशि को तेजी से निपटा सकते हैं और आगे के वित्तीय वर्ष का भी ध्यान रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये विकल्प केवल इस वर्ष के लिए उपलब्ध होंगे। अप्रैल 2021 में GST Council 5वें वर्ष के लिए कार्रवाई की समीक्षा करेगी।