सुशांत मामला: फेक ट्वीट्स दिखाने के लिए आज तक पर एक लाख रुपये का जुर्माना, कई चैनलों को फटकार

नई दिल्ली: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में प्रसारण नियमों के उल्लंघन के लिए न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) ने समाचार चैनल आज तक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, स्व-नियामक इकाई ने अभिनेता की मौत से जुड़ी रिपोर्टिंग की निंदा करते हुए आज तक के अलावा ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 24 और इंडिया टीवी को मृतक की निजता और गरिमा को प्रभावित करने के लिए माफीनामा प्रसारित करने का आदेश दिया है.

एनबीएसए ने कहा कि ‘ख़बरें देना न्यूज़ चैनलों का काम है, जो जनहित में हो सकता है और जिन लोगों के बारे में यह है, उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स में आने के बाद न्याय मिल सकता है, लेकिन इसके साथ यह  महत्वपूर्ण है कि खबर को इस तरह दिया जाए कि यह मृतक की निजता का उल्लंघन न करे, न ही दुखद घटना को सनसनीखेज तरीके से पेश करे. यह महत्वपूर्ण है कि मृतक को अनावश्यक मीडिया चकाचौंध का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए.’

ज्ञात हो कि एनबीएसए स्व-नियामक संस्था है जो न्यूज इंडस्ट्री में प्रसारण आचार संहिता और दिशानिर्देशों को लागू करता है. इसमें 70 चैनलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 27 सदस्य शामिल हैं.

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एके सीकरी इसके अध्यक्ष हैं.

आज तक की विवादित ‘हिट विकेट’ वाली टैग लाइन की तरफ इशारा करते हुए एनबीएसए ने कहा कि ऐसा लगता है कि राजपूत, जो अब दुनिया में नहीं हैं, से सवाल पूछे जा रहे हैं… ये टैगलाइन्स आपत्तिजनक हैं और निजता और गरिमा को प्रभावित करती हैं.’

6 अक्टूबर के आदेश में यह भी कहा गया है कि आज तक ने सुशांत के नाम से ट्वीट्स दिखाने से पहले जरूरी सावधानी नहीं बरती. यह फेक ट्वीट्स थे, जिन्हें बाद में चैनल ने डिलीट कर दिया था.

आज तक पर इसीलिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. एनबीएसए ने इंडिया टीवी और आज तक को मृत अभिनेता का शव दिखाने का भी दोषी पाया है और मृतक का शव दिखाकर प्रसारण नियमों का ‘गंभीर उल्लंघन’ को लेकर माफी मांगने को कहा है.

एनबीएसए ने यह भी कहा कि इन सभी कार्यक्रमों के वीडियो अगर प्रसारकों की वेबसाइट, यूट्यूब या किसी अन्य जगह हैं तो इन्हें फौरन हटा दिया जाना चाहिए.

अथॉरिटी ने यह भी कहा कि माफीनामे के लिए टेक्स्ट, तारीख और समय उनके द्वारा बताया जाएगा. साथ ही आज तक को यह आदेश पूरा करने के बारे में माफीनामे के टेलीकास्ट का साक्ष्य एक कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) में सात दिन के अंदर जमा करना होगा.

ज़ी न्यूज़ और न्यूज़ 24 को भी उनके द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों और टैगलाइन्स को लेकर माफी मांगने को कहा गया है.

एनबीएसए ने इसके साथ ही न्यूज़ नेशन को सुशांत का शव दिखाने के लिए चेतावनी दी थी, लेकिन चैनल द्वारा ऐसा दोबारा न करने और पछतावा जाहिर करने पर अथॉरिटी ने कोई कार्रवाई नहीं की.

इसी तरह एबीपी माझा को भी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया क्योंकि अथॉरिटी के अनुसार उन्होंने अभिनेता के शव के क्लोज़ शॉट (नजदीक से तस्वीर दिखाना) प्रसारित नहीं किए थे.

एनबीएसए ने यह भी माना कि आज तक के रिपोर्टर का अभिनेता की मौत के बाद उनके घर में घुसकर इतने बड़े दुख के समय उनके पिता का इंटरव्यू लेने की कोशिश करना निजता को लेकर दिए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन था.

एनबीएसए ने कहा कि एबीपी ने भी इसी तरह अभिनेता के रिश्ते की एक बहन का इंटरव्यू लेना चाहा था, लेकिन उन्हें चेतावनी नहीं दी गई क्योंकि वह संबंधी खुद आगे आकर ऐसा करना चाहती थीं.

एनबीएसए द्वारा यह कार्रवाई दस शिकायतकर्ताओं के इन चैनलों के प्रसारण को लेकर की गई आपत्तियों के बाद की गई है.

मालूम हो कि जून महीने में फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के बाद से समाचार चैनलों पर इस बारे में प्रसारित की जा रही सामग्री को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.

बीते 28 अगस्त को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले और इससे जुड़ी जांच की कई मीडिया संस्थानों द्वारा की जा रही कवरेज को लेकर आपत्ति जताई थी.

प्रेस काउंसिल ने कहा था कि जांच के बारे में सुनी-सुनाई बातों पर ख़बरें प्रसारित करना ठीक नहीं है. पीड़ित, गवाहों, संदिग्धों को अत्यधिक प्रचार देने से बचें, क्योंकि ऐसा करना उनकी निजता के अधिकार में अतिक्रमण होगा.

काउंसिल ने इस मामले में मीडिया संस्थानों को अपना स्वयं का समानांतर मुकदमा न चलाने और फैसले की पहले ही भविष्यवाणी करने से बचने को कहा था.

सितंबर महीने में महाराष्ट्र के आठ पूर्व पुलिस अधिकारियों ने हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में राजपूत की मौत के मामले में चल रहे ‘मीडिया ट्रायल’ के ख़िलाफ़ आदेश देने की मांग की थी.

उनका कहना है कि टीवी चैनलों का एक वर्ग पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग से एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है. इस पर अदालत ने कहा था किइस मामले में मीडिया से उम्मीद है कि वे रिपोर्ट करते वक्त संयम बरतेंगे ताकि जांच में बाधा न आए.

11 सितंबर को हुई इस मामले की सुनवाई में अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि चैनलों द्वारा ख़बरें प्रसारित करने को लेकर कोई नियमन नहीं है.

अदालत ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी एक पक्ष बनायाथा और उनसे जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा था कि खबर प्रसारित करने के मामले में किस हद तक सरकार का नियंत्रण होता है, खासकर ऐसी खबरों के बारे में जिसका व्यापक असर होता है.

मालूम हो कि 34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे.

सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना के राजीव नगर थाना में अभिनेता की प्रेमिका और लिव इन पार्टनर रहीं अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ अभिनेता को खुदकुशी के लिए उकसाने और अन्य आरोपों में शिकायत दर्ज कराई थी.

सुशांत की मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बिहार सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने मामले की जांच बीते पांच अगस्त को सीबीआई को सौंप दी थी.

इसके बाद बीते 19 अगस्त को बिहार सरकार की अनुशंसा को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वे अभिनेता की मौत के मामले की जांच करें. अदालत ने महाराष्ट्र पुलिस से मामले में सहयोग करने को कहा था.

इस मामले की जांच के दौरान ड्रग्स खरीदने और उसके इस्तेमाल का भी खुलासा होने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने पिछले कुछ दिनों में मामले की जांच के दौरान अभिनेत्री रिया के छोटे भाई शौविक चक्रवर्ती (24), सुशांत सिंह राजपूत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा (33) और अभिनेता के निजी स्टाफ सदस्य दीपेश सावंत को भी गिरफ्तार किया था.

आठ सितंबर को कई दिनों की पूछताछ के बाद एनसीबी ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को भी अभिनेता की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था.

रिया को बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जमानत दी गई है.