केन्द्रीय श्रम मंत्री ने प्रवासी कामगारों और उनके सामने आने वाली समस्याओं पर विश्वसनीय डेटा की आवश्यकता पर दिया जोर

नई दिल्ली (IP News). श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, नई दिल्ली में श्रम ब्यूरो सर्वेक्षण पर विशेषज्ञ समूह की पहली बैठक को संबोधित किया। कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर एस. पी. मुखर्जी की अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह में कई अर्थशास्त्रियों, सांख्यिकीविदों और सरकारी अधिकारियों को शामिल किया गया है। सरकार ने प्रवासन, पेशेवर निकायों, घरेलू श्रमिकों पर सर्वेक्षण और अन्य सर्वेक्षणों के संबंध में श्रम ब्यूरो को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए तीन साल की अवधि के लिए इसकी गठन किया है।

इस अवसर पर, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि श्रमिकों के विशेष वर्गों से संबंधित मुद्दों को समझने के प्रयास में सरकार ने श्रम ब्यूरो को तीन महत्वाकांक्षी सर्वेक्षण का कार्य सौंपा है।

इस महामारी के दौर में प्रवासी कामगारों के सामने आईं मुश्किलों के प्रति गहरी चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के संदर्भ में इन कामगारों और उनके सामने आने वाली मुश्किलों के संबंध में विश्वसनीय डेटा की आवश्यकता पर जोर दिया। यह डेटाबेस सरकार के लिए उनकी स्थितियों में सुधार के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने और उनके लिए रोजगार अवसर पैदा करने की योजना बनाने में सहायक होगा। श्रम ब्यूरो द्वारा कराए जा रहे प्रवासी सर्वेक्षण से देश में प्रवासी कामगारों की संख्या का प्रमाणिक अनुमान लगाने के साथ ही उनके सामने आ रही समस्याओं का आकलन किया जा सकेगा। इस डेटा की आपात आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने विशेषज्ञ समूह से इस सर्वेक्षण से संबंधित तकनीक संबंधी विवरण को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का अनुरोध किया, जिससे इसे बिना किसी देरी के पेश किया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि घरेलू कामगारों पर डेटा संग्रह का काम श्रम ब्यूरो द्वारा किया जा रहा है, जो कि अपनी तरह का पहला सर्वेक्षण है जिसमें हमारे देश के लगभग 3 प्रतिशत कामगार शामिल हैं। सर्वेक्षण से सरकार इस खंड के श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और इन स्थितियों में सुधार के लिए नीतियां तैयार करने में सक्षम हो जाएगी।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि रोजगार और बेरोजगारी पर उपलब्ध हमारे डेटा के स्रोतों के प्रभावी विस्तार के लिए सरकार ने पेशेवर निकायों का एक सर्वेक्षण शुरू किया है, जो श्रम ब्यूरो द्वारा कराया जाएगा। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं और चिकित्सकों जैसे व्यवसायों में पैदा रोजगार के ऊंचे अनुपात को देखते हुए ऐसे व्यवसायों में पैदा होने वाले रोजगार पर आवधिक आकलन कराये जाने की आवश्यकता है। सर्वेक्षण का उद्देश्य रोजगार पर विश्वसनीय और निरंतर डेटा तैयार करना है, जो समग्र रोजगार योजना और संवर्धन में इनपुट का काम करेगा।

इन सर्वेक्षणों को कराने जा रहे संगठन श्रम ब्यूरो की स्थापना 1920 में की गई थी और पिछले100  वर्षों से गुणवत्ता युक्त श्रम आंकड़े प्रदान करने की समृद्ध विरासत लिए हुए है। अपने मूल्य सूचकांकोंप्रशासनिक आंकड़ों और श्रम संबंधित सर्वेक्षण आंकड़ों की वजह से यह राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च ख्याति प्राप्त है। श्रम ब्यूरो मासिक आधार पर औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संकलित करता है जिसका उपयोग देश में केन्द्र और राज्य सरकारों से संबंधित लाखों श्रमिकों और कर्मचारियों की मज़दूरी और महंगाई भत्ते के निर्धारण के लिए किया जाता है। यह औद्योगिक श्रमिकों/खेतिहर श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और खुदरा मूल्य सूचकांक जैसे अन्य उपयोगी सूचकांकों को भी संकलित करता है और श्रम के विभिन्न पहलुओं से संबंधित विभिन्न सर्वेक्षण करता है। संसद द्वारा अनुमोदित चार नए श्रम कोडों के तहत रिटर्नों के माध्यम से प्राप्त हुए आंकड़ों के संरक्षण का अधिकार भी नियमानुसार श्रम ब्यूरो के पास रहेगा।