Wednesday, April 29, 2026
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RKKMS की चिंतन बैठक में जमा गरजे, कहा- JBCCI में इंटक आ चुका है, कामगारों के साथ अन्याय नहीं होगा, जस्ट ट्रांजिशन का उठाया मुद्दा

आरकेकेएमएस के अध्यक्ष, राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी तथा जेबसीसीआई सदस्य एसक्यू जमा ने बैठक को संबोधित किया।

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नागपुर, 11 अप्रेल। श्रमिक नेता एसक्यू जमा ने कहा कि इंटक (INTUC) ने जेबीसीसीआई में एंट्री कर ली है। कोयला कामगारों के साथ अन्यान नहीं होने दिया जाएगा। समझौते पर हस्ताक्षर करना हमारी कोई मजबूरी नहीं है। मंगलवार को इंटक से सम्बद्ध राष्ट्रीय कोयला खदान मजदूर संघ (RKKMS), नागपूर क्षेत्र की चिंतन बैठक आयोजित हुई।

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आरकेकेएमएस के अध्यक्ष, राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी तथा जेबसीसीआई सदस्य एसक्यू जमा ने बैठक को संबोधित किया। श्री जमा ने कहा कि इंटक का वनवास खत्म हो चुका है। न्याययिक लड़ाई के बाद इंटक ने जेबीसीसीआई में अपनी जगह बनाई है, न की किसी के रहम पर। इससे हमारे विरोधियों को ऐसा झटका लगा है कि वे ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे हैं।

श्री जमा ने कहा कि 18 अप्रेल को होने वाली जेबीसीसीआई की 9वीं बैठक में प्रबंधन से सवाल किए जाएंगे। 10वें वेतन समझौते के भी कई बिंदु हैं, जिन पर चर्चा की जाएगी। इंटक ने अपना एजेण्डा कोल इंडिया (CIL) प्रबंधन को भेज दिया हैं। पेंशन, पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट, स्मार्ट कार्ड, मेडिकल अनफिट सहित अन्य मुद्दों पर बात होगी। ठेका कामगारों का मुद्दा भी उठेगा। कोयला कामगारों को मिलनी वाली कई सुविधाओं को धीरे- धीरे खत्म किया जा रहा है, इस पर भी बात होगी। बैठक में श्री जमा ने अन्य श्रमिक संगठनों पर भी जमकर निशाना साधा।

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जेबीसीसीआई में जस्ट ट्रांजिशन पर करेंगे चर्चा

इंटक नेता ने एसक्यू जमा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन यानी जस्ट ट्रांजिशन (Just Transition) जैसा महत्वपूर्ण विषय जेबीसीसीआई में आना चाहिए। क्योंकि सरकार ने वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो इमिशन ((Net Zero Emission) वाला देश बनाने के लिए समझौता किया है। इसके तहत कार्बन उत्सर्जन को शून्य पर लाया जाना है। कोयले के जलने से सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन होता है। 70 फीसदी कोयला आधारित संयंत्रों से उत्पादित होती है। इसको देखते हुए आने वाले वर्षों में कोयला खदानों को बंद करना होगा। कई देशों ने इस पर काम शुरू भी कर दिया है। बिजली दूसरे स्रोतों से प्राप्त करनी होगी। आईएलओ (ILO) ने जस्ट ट्रांजिशन की बात कही है। कोयला खदानों के बंद होने से आजीविका प्रभावित होगी। कोयला खदानों पर प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से निर्भर लोगों पर खासा प्रभाव पड़ेगा। जेबीसीसीआई में इस पर चर्चा होनी चाहिए। जस्ट ट्रांजिशन को लेकर कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया की नीति क्या है, यह सवाल उठाया जाएगा।

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