Opinion : अड़ियल मोदी सरकार ने कृषि कानून वापस नहीं लिया बल्कि संगठित किसानों ने किया बाध्य, इस बात का था डर

आजाद भारत में किसानों की संगठित और अहिंसक लड़ाई ने एक ऐसी सरकार को घुटने टेकने मजबूर कर दिया, जिसका रवैया अंहकारी, अड़ियल, निरंकुश, तानाशाह वाला रहा है।

नई दिल्ली, 19 नवम्बर। आजाद भारत में किसानों की संगठित और अहिंसक लड़ाई ने एक ऐसी सरकार को घुटने टेकने मजबूर कर दिया, जिसका रवैया अंहकारी, अड़ियल, निरंकुश, तानाशाह वाला रहा है।

विवादित तीनों कृषि कानूनों का ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान से ही विरोध के स्वर उठने लगे थे। संसद में बिल पेश किया तब किसानों के साथ तमाम विपक्षी दलों ने इसकी जोरदार मुखालफत की थी। सरकार ने राज्यसभा में भी नियमों को दरकिनार यह बिल पास करवाया। किसानों के सड़क पर उतरने के बाद भी मोदी सरकार इस मुगालते में थी कि वो अन्य मुद्दों की तरह इस विरोध को भी डायवर्ट कर देगी। कोशिश पूरी हुई और विपक्षी नेताओं की तरह आंदोलन कर रहे किसानों को भी टारगेट में लिया गया।

एक रणनीति के तहत किसानों को आढ़तिये, मुठ्ठीभर, खालिस्तानी और देशद्रोही तक के विशेषणों से नवाजा गया। 29 नवम्बर, 2020 से शुरू हुए आंदोलन के दौरान 700 किसानों ने अपनी जान गंवाई। किसानों को गाड़ियों से कुचला गया। आंदोलन में फूट डालने, आंदोलन को तोड़ने के प्रयास हुए। इन सबके बीच किसानों ने गजब की एकजुटता दिखाई और वे पूरी तरह संगठित रहे।

चुनाव में हार का डर

इधर, उपचुनावों में हार और उत्तरप्रदेश, पंजाब सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की दस्तक ने केन्द्र सरकार को सोचने पर मजबूर किया। ग्राउंड रिपोर्ट यह आने लगी कि पंजाब में भाजपा की स्थिति शून्य बटे सन्नाटा होने वाली है। उत्तरप्रदेश में भी राजनीति नुकसान की संभावना जताई गई।

लिहाजा तमाम गुणभाग के बाद मोदी सरकार इसके चाणक्यों को लगा कि विवादित कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाए। गुरुवार, 19 नवम्बर को गुरु पर्व के दिन सुबह नौ बजे प्रधानमंत्री ने नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानून का वापस लेने का ऐलान किया। यहां यह कहना उचित होगा कि मोदी सरकार किसानों के आगे घुटने टेकते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने बाध्य हुई।

किसानों ने प्रधानमंत्री के इस ऐलान का स्वागत किया और खुशियां मनाई, लेकिन यह भी कह दिया कानून संसद में पास हुआ था, वहीं रद्द होगा तभी किसान पूरी तरह संतुष्ट होंगे। किसानों ने एमएसपी को लेकर भी सरकार को चेता दिया गया है।

राकेश टिकैत की छवि और दमदार हुई

किसान आंदोलन ने राकेश टिकैत की छवि को और दमदार किया है। टिकैत की पहचान अब देश के कद्दावर और बहुमत वाले नरेन्द्र मोदी जैसे नेता को झुकाने वाले व्यक्ति की बनेगी।

विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

विवादित तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान ने विपक्ष को भी चुनावी माहौल में सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है। विपक्ष ने सरकार पर हमले भी शुरू कर दिए हैं कि भाजपा ने चुनावी हार से डरकर यह निर्णय लिया है।

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