Tuesday, October 13, 2026
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लाभ में चल रही WCL कैंटीन क्यों जाएगी निजी हाथों में? HMS ने उठाए तीखे सवाल, BMS कटघरे में

2019 में विभागीय रूप से शुरू हुई कैंटीन को निजी हाथों में देने की तैयारी का विरोध; HMS नेता शिवकुमार यादव बोले—कर्मचारियों की सुविधा से कोई समझौता नहीं

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नागपुर। IndustrialPunch : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) मुख्यालय की कैंटीन को निजी हाथों में सौंपने की कवायद को लेकर श्रमिक संगठनों के बीच विवाद तेज होता दिखाई दे रहा है। हिंद मजदूर सभा (HMS) ने कैंटीन को ठेके पर देने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए सवाल उठाया है कि यदि विभागीय कैंटीन को बेहतर तरीके से चलाया जा सकता है और इसमें कार्यरत कर्मचारी काम कर रहे हैं, तो इसे निजी संस्था को सौंपने की जरूरत क्यों पड़ी।

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HMS से जुड़े नेता शिवकुमार यादव ने इस मामले में कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है। उनके अनुसार कैंटीन और गेस्ट हाउस जैसी सुविधाएं कंपनी के कर्मचारियों और उनके परिवारों से सीधे जुड़ी हुई हैं।

2012 से 2018 तक बंद रही कैंटीन, 2019 में हुई विभागीय शुरुआत

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HMS की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक WCL मुख्यालय की कैंटीन 2012 से 2018 तक बंद रही थी। इसके बाद HMS नेता शिवकुमार यादव के प्रयासों से वर्ष 2019 में कैंटीन को विभागीय रूप से दोबारा शुरू किया गया।

HMS के अनुसार कैंटीन के खाते में करीब ₹32 लाख की राशि होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस राशि का स्वतंत्र वित्तीय सत्यापन उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

15 जून की संचालन समिति बैठक के मिनट्स पर विवाद

HMS के अनुसार 15 जून 2026 को WCL संचालन समिति की बैठक आयोजित हुई थी और उसका कार्यवृत्त 27 जुलाई 2026 को जारी किया गया।

संगठन का दावा है कि बैठक में कैंटीन को लेकर विभिन्न प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी। HMS की ओर से कहा गया है कि BMS के आशीष मूर्ति और CMOAI प्रतिनिधि एस.आर. गवले के वक्तव्यों को संगठन निजी/ठेकेदारी व्यवस्था के समर्थन के रूप में देखता है।

वहीं HMS का दावा है कि उसके प्रतिनिधि शिवकुमार यादव ने कैंटीन को विभागीय रूप से संचालित किए जाने के पक्ष में जोरदार समर्थन किया।

यहां महत्वपूर्ण है कि संबंधित बैठक के मूल कार्यवृत्त की प्रति के बिना अलग-अलग प्रतिनिधियों के वक्तव्यों की सटीक भाषा और उसका संदर्भ स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सकता।

कैंटीन के टेंडर को लेकर भी सवाल

HMS की ओर से दावा किया गया है कि कैंटीन के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि टेंडर की वास्तविक राशि को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए जा रहे हैं। इस पूरे मामले में श्रमिक संगठनों के लिए सबसे बड़ा सवाल कैंटीन में वर्तमान में काम कर रहे विभागीय कर्मचारियों के भविष्य को लेकर है।

HMS ने पूछा है कि यदि कैंटीन निजी संस्था को सौंप दी जाती है तो वहां काम कर रहे कर्मचारियों का क्या होगा और उनके रोजगार एवं सेवा शर्तों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

‘निजीकरण का विरोध भाषणों तक सीमित क्यों?’

HMS ने इस मुद्दे को ट्रेड यूनियनों की कथित दोहरी नीति से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि विभिन्न मंचों पर निजीकरण और ठेकेदारी का विरोध किया जाता है, लेकिन जब कंपनी की किसी सुविधा को ठेके पर देने का मामला सामने आता है तो कुछ प्रतिनिधियों की भूमिका अलग दिखाई देती है।

HMS ने सवाल उठाया कि यदि विभागीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत है तो कैंटीन को बंद करने या निजी हाथों में सौंपने के बजाय उसमें सुधार क्यों नहीं किया जाता? संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ठेकेदारी ही समाधान है तो उत्पादन एवं अन्य कार्यों में ठेकेदारी का विरोध क्यों किया जाता है।

CITU और AITUC की भूमिका पर भी चर्चा

HMS के अनुसार संचालन समिति की बैठक में AITUC प्रतिनिधि की ओर से कोई विशेष टिप्पणी नहीं की गई, जबकि CITU के प्रतिनिधि एस.एच. बेग ने सुधार की बात रखी। HMS का कहना है कि कैंटीन को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव का स्पष्ट विरोध किया जाना चाहिए था। हालांकि, इन प्रतिनिधियों की वास्तविक टिप्पणियों की पुष्टि के लिए मूल बैठक कार्यवृत्त का संदर्भ आवश्यक है।

‘कैंटीन का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, कर्मचारी सुविधा है’

HMS का तर्क है कि कंपनी की कैंटीन का गठन मूल रूप से व्यावसायिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से नहीं किया गया था, बल्कि कर्मचारियों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किया गया था।

संगठन का दावा है कि इसके बावजूद विभागीय संचालन में कैंटीन के खाते में कई लाख रुपये की राशि उपलब्ध है। HMS ने कहा कि यदि कैंटीन को बेहतर प्रबंधन और आवश्यक सुधार के साथ चलाया जाए तो इसे कर्मचारियों के हित में जारी रखा जा सकता है।

शिवकुमार यादव ने CMD से भी उठाया मुद्दा

HMS के अनुसार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवकुमार यादव लगातार WCL CMD डॉ. हेमंत पांडे से इस विषय पर बातचीत कर रहे हैं। HMS ने स्पष्ट किया है कि वह कैंटीन और गेस्ट हाउस को निजी हाथों में सौंपने के फैसले का विरोध करेगा और वहां कार्यरत कामगारों के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाता रहेगा।

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सबसे बड़ा सवाल—कामगारों का क्या होगा?

WCL मुख्यालय कैंटीन को लेकर अब विवाद केवल कैंटीन के संचालन तक सीमित नहीं रह गया है। मामला विभागीय कर्मचारियों के रोजगार, कर्मचारी सुविधाओं, कंपनी की संपत्ति के उपयोग और निजीकरण/ठेकेदारी की नीति से जुड़ गया है।

अब निगाहें WCL प्रबंधन के अगले कदम पर हैं कि कैंटीन के प्रस्तावित ठेके के साथ वर्तमान कर्मचारियों के लिए क्या व्यवस्था की जाती है और कर्मचारी संगठनों की आपत्तियों पर प्रबंधन क्या निर्णय लेता है।

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