रायपुर (आईपी न्यूज)। राज्य में उपलब्ध संसाधनों, राज्य की आवश्यकताओं, स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति वर्ष 2019-24 तैयार की गयी है। इस नीति में सामवेशी विकास, आत्मनिर्भर और परिपक्व अर्थव्यवस्था वाले नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए राज्य में बंपर मात्रा में उत्पादित धान से जैव ईंधन एथेनाल की रिफायनरी की स्थापना, फल, फूल, सब्जी एवं अन्य हार्टिकल्चर उत्पादों के प्रसंस्करण, लघु वनोपज, हर्बल प्रसंस्करण इकाईयों एवं खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए हैं। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय औद्योगिक इकाईयों की मार्केटिंग, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए परिवहन अनुदान, पिछड़े क्षेत्रों में लगने वाली इकाईयों को विशेष रियायतें देने के प्रावधान किए गए है।
राज्य में कोर सेक्टर उद्योगों की स्थापना
औद्योगिक नीति 2019-24 में राज्य में कोर सेक्टर उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ नई तकनीकी उद्योगों की स्थापना कराई जायेगी। इसके लिए एक नई उच्च प्राथमिकता की श्रेणी बनाई गई है, जिसमें विश्व स्तर की नवीन तकनीक पर आधारित उद्योगों जैसे- रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग पर आधारित उद्योग, एयर क्राफ्ट रिपेयर को रखा गया है। इसके साथ ही राज्य के किसानों की भलाई में बंपर मात्रा में उत्पादित धान से जैव ईंधन एथेनाल की रिफायनरी, राज्य में उत्पादित फल, फूल, सब्जी एवं अन्य हार्टिकल्चर उत्पाद प्रसंस्करण आदि को उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है। राज्य में आम जनता के किफायती परिवहन को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक दो पहिया, तीन पहिया एवं चार पहिया वाहनों में लगने वाली बैटरी निर्माण एवं संधारण और इनके चार्जिंग स्टेशन के उपकरण के निर्माण को अधिकतम औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन देने के लिए उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है।
स्थानीय निवासियों को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना
सरकार के वादे के अनुसार नई औद्योगिक नीति में राज्य के स्थानीय निवासियों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए नये लगने वाले उद्यम में स्थाई नियोजन के लिए अकुशल श्रेणी में 100 प्रतिशत, कुशल श्रेणियों में न्यूनतम 70 प्रतिशत एवं प्रशासकीय तथा प्रबंधकीय श्रेणी में न्यूनतम 40 प्रतिशत रोजगार राज्य के स्थाई निवासियों को प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं। स्थानीय औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए इन इकाईयों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए सभी विभागों के लिए स्थानीय निर्माताओं द्वारा निर्मित वस्तुओं के क्रय को अनिवार्य बनाया जा रहा है। प्रदेश से विदेशों को निर्यात में सबसे बड़ी बाधा है, राज्य में किसी पोर्ट का नहीं होना, राज्य सरकार ने इस क्षेत्र को गति देने के लिए नई सुविधा-परिवहन अनुदान की घोषणा की है, जिससे राज्य के निर्यातक इकाइयों को निर्यात के लिए नवीन आर्थिक निवेश प्रोत्साहन सुविधा मिलेगी।
आबंटित भूमि की दरों में 30 प्रतिशत की कमी
प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए विभागों द्वारा आबंटित भूमि की दरों में 30 प्रतिशत तथा लीजरेंट की दरों में एक प्रतिशत की कमी की गई है। औद्योगिक भूमि को फ्री होल्ड करने, सब लीज करने तथा अन्य प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है। देश में जीएसटी कर लागू होने के पश्चात राज्य के नवीन उद्योगों की स्थापना की गति धीमी हो गई है इसे पुनः गति देने के लिए इस औद्योगिक नीति 2019-24 में नई सुविधा देने हेतु उद्योगों को नेट राज्य वस्तु एवं सेवाकर की प्रतिपूर्ति की नई सुविधा घोषित की गई है। इससे राज्य में उद्योगों की स्थापना में गति आएगी। राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए औद्योगिक नीति 2019-24 में राज्य के सभी विकासखण्डों को उनके पिछड़ेपन की दृष्टिकोण से चार श्रेणियों में वर्गीकृत करने से अधिकतम सुविधाएं पिछड़े क्षेत्रों के लिए घोषित की गई है।
औद्योगिक नीति 2019-24 में यह प्रावधान किया गया है कि मांग के आधार पर राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिए सी.एस.आई.डी.सी. द्वारा बहुमंजिला औद्योगिक भवन एवं शेड का निर्माण कर औद्योगिक पार्कों में उपलब्ध कराये जाएंगे। वर्तमान में प्रचलित सिंगल विंडो सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए इसे सिमलेस एण्ड इन्वेस्टर फ्रेंडली बनाया जा रहा है। जिससे परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रशासनिक ढांचे सभी आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
पिछड़े हुए विकासखंडो के क्षेत्रों का भी औद्योगिक विकास
राज्य में कोर सेक्टर के उद्योगों जैसे- स्पंज आयरन उद्योग, एकीकृत स्टील प्लांट, ताप विद्युत संयंत्र, राईस मिल (परबाईलिंग प्लांट सहित) उद्योगों को ’’स’’ एवं ’’द’’ श्रेणी के पिछडे विकासखडों में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए पात्र उद्योग की श्रेणी में रखा गया है ताकि पिछड़े हुए विकासखंडो के क्षेत्रों का भी औद्योगिक विकास हो सके। औद्योगिक पुरस्कार योजना के अंतर्गत पुरस्कार राशि को बढ़ाते हुए स्टार्ट अप श्रेणी की इकाईयों के लिए भी पुरस्कार का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए स्व सहायता समूहों एवं फार्मर्स प्रोड्यूसिंग आर्गनाईजेशन को भी उद्यमीध्निवेशकों की श्रेणी में सम्मिलित किया गया है।
एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन
औद्योगिक नीति 2019-24 में नया प्रावधान करते हुए उद्योग से संबंधित एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों को औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। यह व्यवस्था की गई है कि एमएसएमई सेवा श्रेणी उद्यमों को सेवा गतिविधि प्रमाण पत्र प्रमाण पत्र जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्रों द्वारा जारी किए जाएंगे ताकि उन्हें इस नीति में प्रावधानित प्रोत्साहन उपलब्ध होने में कोई बाधा न रहे। राज्य में अनुसंधान और विकास के लिए प्रयोगशाला की स्थापना में रूचि रखने वाले उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा तथा भूमि सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं सेवा उद्यमों के बराबर उपलब्ध कराया जाएगा।
हस्तशिल्पियों, बुनकरों, मिट्टी एवं कांसाधातु के उद्योगों को बढ़ावा
उद्योगों नीति में सभी प्रकार के पालिथीन बैग, प्लास्टिक के डिस्पोजेबल उत्पाद पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर आदि को सम्पूर्ण राज्य में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए अपात्र उद्योगों की श्रेणी में रखा गया है। राज्य के हस्तशिल्पियों, बुनकरों, मिट्टी एवं कांसाधातु के उद्योगों के विकास के लिए राज्य के भंडार क्रय नियम पोर्टल ई-मानक के द्वारा विपणन का माध्यम उपलब्ध कराया जाएगा। निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रोंध्औद्योगिक पार्कों को अधोसंरचना हेतु अनुदान की व्यवस्था की गई है तथा इनमें स्थापित होने वाले उद्योगों को अनुदान से संबंधित प्रकरणों में निर्धारित अनुदान के 10 प्रतिशत अधिक अनुदान देय होगा व अधिकतम सीमा भी 10 प्रतिशत अधिक होगी। 100 करोड़ रूपए से अधिक निवेश करने वाले नॉन कोर सेक्टर के मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को आर्थिक निवेश प्रोत्साहन के अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाने के लिए बी-स्पोक पॉलिसी रखी गई है। इस नीति के अंतर्गत उद्योग की स्थापना पर ब्याज अनुदान विकासखण्डों की श्रेणी के आधार पर दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
सामान्य उद्योगों को 40 से 65 प्रतिशत तक अधिकतम राशि 40 लाख रूपए प्रतिवर्ष की दर से अधिकतम 8 वर्ष तक प्राथमिकता उद्योगों को 50 से 70 प्रतिशत अधिकतम राशि 50 लाख रूपए प्रतिवर्ष की दर से अधिकतम 10 वर्ष तक एवं उच्च प्राथमिकता उद्योगों को 50 से 70 प्रतिशत अधिकतम राशि 55 लाख प्रतिवर्ष की दर से 11 वर्ष तक कोर सेक्टर के मध्यम, वृहद, मेगा, अल्ट्रा मेगा उद्योगो को ’’द’’ श्रेणी के विकासखण्डों में उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 7 वर्ष तक 100 प्रतिशत तक विद्युत शुल्क छूट का प्रावधान किया गया है। मंडी शुल्क छूट में नवीन, सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं वृहद इकाइयों को पांच वर्ष तक अधिकतम 2 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष तक की छूट रहेगी। राज्य में उत्पादित होने वाले हर्बल, वनौषधि तथा लघु वनोपज आधारित उद्योगों को उच्च प्राथमिकता के अंतर्गत अतिधतम ब्याज अनुदान, नेट जीएसटी प्रतिपूर्ति, स्टाम्प ड्यूटी छूट, विद्युत शुल्क छूट, देने का प्रावधान किया गया है।
सरगुजा एवं बस्तर क्षेत्र में 20 एकड़ तक के निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना को अनुमति देते हुए इस पर 4 करोड़ रूपए तक का अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों के विरूद्ध अनुदान के रूप में दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

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