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कोरबा। विगत दिनों बालको (Balco) में अमित जोगी के नेतृत्व में आयोजित किया गया ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन पूरी तरह असफल रहा। इस आंदोलन से कामगार तो दूर ही रहे, स्थानीय लोगों ने भी कोई रूचि नहीं दिखाई। आंदोलन को जनसमर्थन नहीं मिले से अमित जोगी की मंशा पर भी सवाल उठ खड़े हुए।

रोजगार सहित विभिन्न मांगों को लेकर जोगी कांग्रेस ने बालको प्रबंधन के खिलाफ यह आंदोलन आयोजित किया था। संयंत्र के समक्ष परसाभाठा में बुलाए गए आंदोलन मेंं गिनती के लोग ही नजर आए। अमित जोगी (Amit Jogi) ने बालको प्रबंधन पर मजदूरहितों की अनदेखी, रोजगार आदि को लेकर कई आरोप मढ़े, लेकिन ज्यादातर आरोप तथ्यों के विपरीत थे। कामगारों और क्षेत्र के लोगों को अमित जोगी द्वारा एकाएक किए गए आंदोलन का उद्देश्य समझ नहीं आया। स्थानीय लोगों का कहना था कि आंदोलन में उठाए गए मुद्दे आम नागरिकों को उतने प्रभावी नहीं लगे, जितनी उम्मीद की जा रही थी।

जोगी कांग्रेस और इसके नेता अमित जोगी का प्रभाव बालकोनगर क्षेत्र में नगण्य है। संगठनात्मक ढांचा नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं का अभाव है। दूसरा अमित जोगी द्वारा उठाए गए मुद्दे प्रभावी नहीं थे। मजदूरों का कहना था कि जिन मुद्दों को आंदोलन में उठाया गया, वे उनके लिए प्राथमिकता के विषय नहीं थे।

स्थानीय नागरिकों का मानना था कि आंदोलन से क्षेत्र की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकलने की कोई संभावना नहीं है, जिसके कारण उन्होंने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आंदोलन स्थानीय मुद्दों से अधिक राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास था। इस वजह से आम लोगों का भरोसा और भागीदारी दोनों सीमित रही।

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स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं द्वारा दी गई जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर होने के कारण भी आंदोलन की तैयारी और जनसमर्थन बेअसर दिखाई दिया।

सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया था। स्थिति ऐसी रही कि कई समय पर आंदोलनकारियों की तुलना में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की संख्या अधिक दिखाई दी।

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