कोरबा, 10 अप्रेल। मिडिल ईस्ट क्राइसेस (Middle East Crisis) के कारण इंडस्ट्रियल डीज़ल और एक्सप्लोसिव रॉ मटीरियल की कीमतों में इजाफा होने का असर कोयला उत्पादन की लागत पर आ रहा है।
यहां बताना होगा कि कोल सेक्टर में इंडस्ट्रियल डीज़ल और एक्सप्लोसिव रॉ मटीरियल यानी अमोनियम नाइट्रेट (AN) की बड़ी खपत है। पश्चिम एशिया संकट के कारण इंडस्ट्रियल डीज़ल की कीमत 54 प्रतिशत तक बढ़ी है। एक्सप्लोसिव रॉ मटीरियल की कीमतें 44 फीसदी तक बढ़ गईं हैं।
इंडस्ट्रियल डीज़ल की कीमतें मार्च के बीच में 92 प्रति लीटर से बढ़कर 1 अप्रैल तक 142 प्रति लीटर हो गई। जानकारी के मुताबिक कोल इंडिया (CIL) में सालाना डीज़ल की खपत लगभग 4.19 लाख किलोलीटर है। इंडस्ट्रियल डीज़ल की कीमत बढ़ने से इसका असर माइनिंग गतिविधियों और ट्रांसपोर्टेशन के ऑपरेशनल कॉस्ट पर पड़ेगा।
कोयला खदानों में विस्फोट के लिए अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग होता है। बताया गया है कि सीआईएल हर साल लगभग 9 लाख मीट्रिक टन एक्सप्लोसिव इस्तेमाल करता है। एक्सप्लोसिव की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। 1 अप्रेल, 2026 तक यह 50,500 प्रति टन से 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 प्रति टन हो गई है। इससे एक्सप्लोसिव की औसत लागत में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो फरवरी में 39,588 प्रति टन से बढ़कर मार्च के आखिर तक 49,783 प्रति टन हो गई। एक्सप्लोसिव की कीमत बढ़ने का सीधा असर ओपनकास्ट खदानों में ब्लास्टिंग ऑपरेशन पर पड़ रहा है।
सीआईएल ने मार्केट स्ट्रैटेजी को रीकैलिब्रेट किया
कोल इंडिया प्रबंधन बढ़ती लागत को झेल रहा है। सीआईएल ने सप्लाई चेन पर दबाव का संकेत देते हुए कहा, “कंपनी कॉन्ट्रैक्टर्स को इंडस्ट्रियल डीज़ल की बढ़ी हुई कीमत का मुआवज़ा भी दे रही है… जो इसे बल्क क्वांटिटी में खरीदते हैं।“ जबकि कॉस्ट बढ़ती जा रही है, कंपनी ने कंज्यूमर्स को तुरंत कोई भी पास-थ्रू नहीं दिया है। उसने कहा, “बढ़ती कीमतों का कोई भी पास-थ्रू एक कैस्केडिंग इफ़ेक्ट पैदा करेगा।“ इसके बजाय, सीआईएल ने अपनी मार्केट स्ट्रैटेजी को रीकैलिब्रेट किया है, जिसमें कुछ ई-ऑक्शन में रिज़र्व प्राइस कम करना और सप्लाई वॉल्यूम बढ़ाना शामिल है।
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