कोरबा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं कोयला खान एवं इस्पात सबंधी स्थायी समिति सदस्य श्रीमती ज्योत्सना महंत (MP Jyotsna Mahant) ने एसईसीएल सीएमडी को लिखे पत्र में कोरबा जिले के कोयला खदानों के भू-विस्थापित परिवारों के भविष्य और उनके रोजगार की गंभीर समस्या को देखते वर्तमान नियमों में क्रांतिकारी बदलाव करने की मांग की है।
सांसद ने स्पष्ट किया है कि कोल इंडिया की मौजूदा नीतियों के कारण केवल 20% प्रभावित परिवारों को रोजगार मिल पा रहा है। जबकि 80% लोग आज भी अपने हक के लिए भटक रहे हैं सांसद महंत ने कोल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि रोजगार न मिलने के कारण क्षेत्र में आए दिन होने वाले आंदोलन और धरना-प्रदर्शन से न केवल उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि राष्ट्र के राजस्व को भी बड़ी हानि होती है ।
सांसद ने स्थानीय युवाओं और विस्थापितों को सशक्त बनाने के लिए निम्नलिखित ठोस प्रस्ताव रखे हैं:
- वर्तमान में भू-विस्थापित फर्मों और सहकारी समितियों के लिए आरक्षित 5 लाख रुपये की टेंडर सीमा को बढ़ाकर न्यूनतम 20 लाख रुपये किया जाए।
- विस्थापितों के लिए वार्षिक टेंडर सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है ताकि उन्हें बड़े काम मिल सकें।
- चूंकि अब अधिकांश कार्य आउटसोर्सिंग के जरिए हो रहे हैं सांसद ने मांग की है कि मिट्टी और कोयला उत्खनन करने वाली निजी कंपनियों सहित खदान के अन्य संबंधित में कार्यों में कम से कम 80 प्रतिशत भर्ती स्थानीय विस्थापित परिवारों से ही अनिवार्य की जाए।
- SECL में लगने वाले सभी चार पहिया वाहनों के टेंडर को पूर्णतः भू-विस्थापितों के लिए आरक्षित किया जाए ।
विस्थापितों का हक हमारी प्राथमिकता।
सांसद ज्योत्सना महंत ने पत्र के माध्यम से प्रबंधन को अवगत कराया है कि गेवरा दीपका और कुसमुंडा जैसे मेगा प्रोजेक्ट में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि SECL प्रबंधन इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन करेगा जिससे हजारों बेरोजगार परिवारों को सम्मानजनक आजीविका मिल सके।
कोरबा लोकसभा सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने कहा कि जब जमीन हमारी है तो उस पर पहला हक भी हमारा होना चाहिए हम विकास के विरोधी नहीं हैं लेकिन विस्थापितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।
गौरतलब है कि ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के प्रयासों से 2021-22 से भूविस्थापित कोटा के तहत 5 लाख रुपये तक की मूल्य के टेंडर आरक्षित किया गया था और उसकी सीमा बढ़ाने का आश्वसन दिया गया था, किंतु कोयला प्रबंधन इस दिशा में उदासीन रवैय्या अपनाए हुये है इस मुद्दे पर संगठन ने एसईसीएल सहित जिले के जनप्रतिनिधियों को गंभीरता दिखाने की मांग किया था।
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