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कोरबा, 23 जून (Industrial Punch Desk) : देश का पावर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 530 गीगावाट (GW) को पार कर चुकी है और अगले वर्ष इसके 600 GW तक पहुंचने की संभावना है। इस वृद्धि में नवीकरणीय ऊर्जा, तापीय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं का बड़ा योगदान है।

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बढ़ती बिजली मांग के बीच देश में ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हाल ही में देश की पीक पावर डिमांड 270 गीगावाट से अधिक दर्ज की गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है।

इस बीच, NTPC Limited ने नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण के लिए अपने तापीय बिजली संयंत्रों में 5 GWh क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) स्थापित करने की पहल शुरू की है। लगभग 5,000 करोड़ रुपये के इस निवेश से सौर और पवन ऊर्जा के बेहतर उपयोग तथा ग्रिड स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

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नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी तेजी देखने को मिल रही है। जनवरी-मई 2026 के दौरान भारत में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कोयला आयात चार वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। सरकार का लक्ष्य ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी को लगातार बढ़ाना है।

इसके अलावा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए देश का पहला WT-MARUT पोर्टल लॉन्च किया है, जो विंड टरबाइन सप्लाई चेन प्रबंधन को मजबूत करेगा और 2035 तक 155 GW पवन ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

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बढ़ती बिजली मांग, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश, बैटरी स्टोरेज तकनीक और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के चलते भारतीय पावर सेक्टर आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बनने की ओर अग्रसर है।

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