Saturday, July 4, 2026
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कोल इंडिया में सीक्रेट बैलेट की तैयारी, बदलेगी ट्रेड यूनियनों की मान्यता और वेतन वार्ता व्यवस्था

बताया गया है कि पिछले दिनों कोलकाता में कोल इंडिया एवं सभी अनुषंगिक कंपनियों के निदेशकों (मानव संसाधन) की उच्च स्तरीय बैठक में आयोजित हुई थी

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कोरबा, 2 जुलाई (IndustrialPunch Desk) : कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में ट्रेड यूनियनों की मान्यता (Recognition) और वेतन वार्ता (Wage Negotiation) की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। केंद्र सरकार द्वारा लागू औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), 2020 के प्रावधानों के अनुरूप कोयला उद्योग में ट्रेड यूनियनों की पहचान के लिए सीक्रेट बैलेट (Secret Ballot) प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगामी 12वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते (NCWA-XII) से पहले यूनियनों की प्रतिनिधिक क्षमता तय करने के लिए नई व्यवस्था अपनाई जा सकती है। इससे वर्षों से चली आ रही यूनियनों की मान्यता और जेबीसीसीआई (JBCCI) में प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है।

बताया गया है कि पिछले दिनों कोलकाता में कोल इंडिया एवं सभी अनुषंगिक कंपनियों के निदेशकों (मानव संसाधन) की उच्च स्तरीय बैठक में आयोजित हुई थी। इस बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया कि:

  • 12वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते (NCWA-XII) पर चर्चा के लिए प्रमुख ट्रेड यूनियनों की सहमति से समिति गठित करने का निर्णय।
  • मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) को वेरिफिकेशन अधिकारी नियुक्त करने की अनुशंसा।
  • सभी मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों को प्रक्रिया में शामिल करने पर सहमति।
  • सीक्रेट बैलेट की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) द्वारा किए जाने का प्रस्ताव।
  • बैलेट के दौरान गतिविधियों की वीडियोग्राफी एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था।
  • औद्योगिक संबंध संहिता के अनुरूप प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में पहल।

यूनियनों के समक्ष प्रमुख सवाल

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नई व्यवस्था लागू होने पर सबसे बड़ा प्रश्न यह होगा कि जेबीसीसीआई-12 में किन ट्रेड यूनियनों को प्रतिनिधित्व मिलेगा और किस आधार पर वेतन वार्ता में भागीदारी तय होगी। यदि किसी एक यूनियन को बहुमत प्राप्त होता है तो वह नेगोशिएटिंग यूनियन बन सकती है, जबकि बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में नेगोशिएटिंग काउंसिल का गठन किया जा सकता है।

क्या बदलेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि सीक्रेट बैलेट लागू होने से यूनियनों की वास्तविक सदस्यता और श्रमिकों के समर्थन का पारदर्शी आकलन संभव होगा। इससे वेतन वार्ता की प्रक्रिया अधिक संस्थागत और पारदर्शी बनने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ श्रमिक संगठनों ने इस व्यवस्था के कुछ प्रावधानों पर सवाल भी उठाए हैं और उनका कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष एवं स्वतंत्र होनी चाहिए।

कोयला उद्योग के लाखों कर्मचारियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सीक्रेट बैलेट की प्रक्रिया कब शुरू होती है और इसके आधार पर जेबीसीसीआई-12 का गठन किस स्वरूप में किया जाता है।

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