नागपुर। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ (BKMS) के चंद्रपुर, बल्लारपुर और वर्धा वैली क्षेत्रों में चल रहे आंतरिक विवाद को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश जारी किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यूनियन के वैध पदाधिकारियों को लेकर विवाद न्यायालय में विचाराधीन (Sub-Judice) है, इसलिए अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक प्रबंधन दोनों गुटों के प्रति पूरी तरह तटस्थ (Neutral) रहेगा।
14 जुलाई 2026 को इंडस्ट्रियल रिलेशंस विभाग द्वारा जारी पत्र में बल्लारपुर और चंद्रपुर क्षेत्र के महाप्रबंधकों को निर्देश दिया गया है कि वे BKMS के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के साथ किसी भी प्रकार का पक्षपात न करें।
पत्र में बताया गया है कि 30 जनवरी 2026 को उप-पंजीयक, ट्रेड यूनियन्स, नागपुर द्वारा जारी Consent Certificate (Form-L) में केवल यूनियन के कार्यकारिणी गठन को लेकर विवाद दर्ज किए जाने का उल्लेख है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यह विवाद Trade Unions Act, 1926 की धारा 28(1-A) के अंतर्गत आता है, जिसका अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
WCL ने अपने आदेश में कहा है कि चूंकि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए कंपनी की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ के दोनों गुटों के प्रति समान और निष्पक्ष व्यवहार बनाए रखे। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक सक्षम न्यायालय अथवा संबंधित प्राधिकरण की ओर से अंतरिम या अंतिम आदेश जारी नहीं हो जाता।
इस पत्र को चंद्रपुर, बल्लारपुर और वर्धा वैली क्षेत्रों में BKMS के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक WCL किसी भी गुट को आधिकारिक मान्यता या विशेष प्राथमिकता नहीं देगा।
industrial punch is now on Whatsapp Channels. Click here to join
IndustrialPunch | The Voice of Industry & Workforce









