Thursday, July 16, 2026
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NCWA-XI पर बड़ा बवाल: विवाहित आश्रित बेटियों की नौकरी पर ‘ब्रेक’, मिनट्स ने बढ़ाया विवाद, विनय रंजन पर आरोप

1 जुलाई 2021 से लाभ लागू करने की यूनियनों की मांग पर नहीं मिला स्पष्ट जवाब, मानकीकरण समिति के मिनट्स पर उठे गंभीर सवाल

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कोरबा, 16 जुलाई (IndustrialPunch Desk) : कोल इंडिया (CIL) के नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट- XI (NCWA- XI) के तहत विवाहित आश्रित बेटियों को नौकरी देने के मुद्दे पर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। JBCCI- XI की मानकीकरण समिति की सातवीं बैठक के मिनट्स जारी होने के बाद ट्रेड यूनियनों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

यूनियनों का आरोप है कि कर्मचारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस मुद्दे को बैठक में अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया और अंतिम मिनट्स में भी इसे केवल “अन्य विषय” (Any Other Items) के अंतर्गत दर्ज कर दिया गया।

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यह मामला उन हजारों परिवारों से जुड़ा है, जिनकी विवाहित आश्रित बेटियों के रोजगार के आवेदन 11 जून 2024 से पहले लंबित थे और जो NCWA- XI की प्रभावी तिथि 1 जुलाई, 2021 से लाभ मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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क्या है पूरा मामला?

16 जून, 2024 को कोल इंडिया द्वारा Implementation Instruction (II)- 16 जारी किया गया था। इस निर्देश में विवाहित आश्रित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने का प्रावधान किया गया, लेकिन इसे 11 जून 2024 से प्रभावी माना गया।

ट्रेड यूनियनों ने शुरुआत से ही इसका विरोध किया। उनका कहना था कि चूंकि NCWA- XI स्वयं 1 जुलाई, 2021 से प्रभावी है, इसलिए इस निर्देश का लाभ भी उसी तिथि से मिलना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो 1 जुलाई 2021 से 10 जून, 2024 के बीच के सभी पात्र मामलों के साथ अन्याय होगा।

17 अप्रैल की बैठक, 14 जुलाई को जारी हुए मिनट्स

इस मुद्दे पर 17 अप्रैल, 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित JBCCI-XI की सातवीं मानकीकरण समिति की बैठक में चर्चा हुई। बैठक के ड्राफ्ट मिनट्स पहले समिति सदस्यों को भेजे गए थे।

ड्राफ्ट मिनट्स पर कोयला श्रमिक सभा (HMS) के नेता एवं मानकीकरण समिति के सदस्य शिवकुमार यादव ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने समिति अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की कि Implementation Instruction-16 से संबंधित मामलों में 1 जुलाई, 2021 से पूर्वव्यापी (Retrospective) लाभ देने की यूनियनों की मांग को स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड किया जाए।

अंतिम मिनट्स में क्या दर्ज हुआ?

14 जुलाई 2026 को जारी अंतिम मिनट्स में यह विषय केवल “अन्य विषय” के बिंदु (g) के रूप में दर्ज किया गया।

उसमें लिखा गया है—

“NCWA-XI पर हस्ताक्षर की तिथि से कार्यान्वयन निर्देश संख्या-16 का पूर्वव्यापी कार्यान्वयन।”

यूनियनों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर न तो विस्तृत चर्चा का उल्लेख है और न ही किसी निर्णय या सिफारिश का स्पष्ट रिकॉर्ड। इससे कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

यूनियनों ने उठाए कई सवाल

मिनट्स जारी होने के बाद यूनियन नेताओं ने कई प्रश्न उठाए हैं—

  • यदि बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी, तो उसका विस्तृत उल्लेख मिनट्स में क्यों नहीं है?
  • ड्राफ्ट मिनट्स पर दर्ज आपत्तियों का अंतिम मिनट्स में उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
  • इस मुद्दे को अलग एजेंडा के बजाय “अन्य विषय” में क्यों रखा गया?
  • क्या प्रबंधन ने इस मांग पर विचार करने से परहेज किया या निर्णय को टाल दिया?
  • यूनियनों का कहना है कि इससे कर्मचारियों में भ्रम और असंतोष दोनों बढ़े हैं।

विवाहित आश्रित बेटियों की उम्मीदों पर असर

यदि मौजूदा Implementation Instruction-16 में कोई संशोधन नहीं होता, तो 11 जून 2024 से पहले के मामलों में विवाहित आश्रित बेटियों को नियोजन का लाभ मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि यूनियनें इस निर्देश को 1 जुलाई 2021 से लागू करने की मांग पर लगातार जोर दे रही हैं।

निदेशक HR विनय रंजन पर लगे आरोप

कुछ ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पहले लिए गए निर्णयों और चर्चा की दिशा में बदलाव किया गया। कोल इंडिया के निदेशक (मानव संसाधन) डा. विनय रंजन पर इसको लेकर आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है निदेशक मानव संसाधन ने इस मामले का विवादित बना दिया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कोल इंडिया लिमिटेड या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

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अब सबकी नजर अगले फैसले पर

कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों और प्रभावित परिवारों की निगाहें अब कोल इंडिया प्रबंधन और JBCCI की आगामी बैठकों पर टिकी हैं। यदि इस मुद्दे पर कोई स्पष्टीकरण या संशोधित आदेश जारी नहीं होता, तो यह मामला आगे भी ट्रेड यूनियनों और प्रबंधन के बीच विवाद का विषय बना रह सकता है।

Industrial Punch Analysis

Implementation Instruction-16 का मुद्दा केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि समान अवसर, सेवा शर्तों और अनुकंपा नियुक्ति नीति से जुड़ा संवेदनशील विषय है। फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि यूनियनों ने 1 जुलाई 2021 से पूर्वव्यापी लाभ की मांग दोहराई है, लेकिन जारी मिनट्स में इस पर कोई अंतिम निर्णय दर्ज नहीं है। ऐसे में यह मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता और भविष्य में इस पर प्रबंधन की आधिकारिक स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

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