नई दिल्ली। भारत के कोयला बाजार में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने देश में कोयला एक्सचेंज (Coal Exchange) की स्थापना की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू करते हुए पंजीकरण (Registration) के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही भारत पहली बार एक संगठित, पारदर्शी और तकनीक आधारित कोयला ट्रेडिंग व्यवस्था की ओर बढ़ गया है।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में आयोजित इंडियन माइनिंग वीक 2026 के पूर्वावलोकन कार्यक्रम में इस पोर्टल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त भी उपस्थित रहे।
क्या है Coal Exchange?
कोयला एक्सचेंज एक डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म होगा, जहां कोयला उत्पादक, व्यापारी और उपभोक्ता प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत नियमों के तहत कोयले की खरीद-बिक्री और डिलीवरी आधारित अनुबंध कर सकेंगे। इससे बाजार आधारित मूल्य निर्धारण (Market-Based Price Discovery), गुणवत्ता की पारदर्शी जांच, सुरक्षित भुगतान व्यवस्था और प्रभावी शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में कोयला व्यापार अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और आधुनिक बनेगा।
25 वर्षों के लिए मिलेगा रजिस्ट्रेशन
कोयला एक्सचेंज स्थापित करने वाली पात्र संस्थाओं को 25 वर्षों के लिए रजिस्ट्रेशन दिया जाएगा। इनके संचालन, निगरानी और विनियमन की जिम्मेदारी कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन (CCO) को सौंपी गई है, जिसे इस व्यवस्था का नियामक प्राधिकरण बनाया गया है।
2025 के कानून के बाद बड़ा कदम
कोयला एक्सचेंज की व्यवस्था खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत संभव हुई है। इसके बाद कोयला मंत्रालय ने Coal Exchange Rules, 2026 अधिसूचित किए, जिनके आधार पर अब आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई है।
विशेष बात यह है कि नियम अधिसूचित होने के केवल एक महीने के भीतर ही CCO ने आवेदन प्रक्रिया, दिशा-निर्देश और ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर दिया।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
आवेदक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकेंगे, आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे, भारतकोष पोर्टल से शुल्क का ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे, आवेदन जमा करने के बाद उसकी रियल-टाइम स्थिति भी देख सकेंगे, इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
कोयला बाजार में आएगा बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि Coal Exchange शुरू होने से देश में कोयले की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी, निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी दरों पर कोयला उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था भारत के ऊर्जा क्षेत्र को अधिक दक्ष, आधुनिक और बाजार उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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