Friday, July 17, 2026
Home Industrial (हिंदी) कोल DMF फंड पर CAG का बड़ा ‘प्रहार’: ₹4,536 करोड़ खर्च, फिर भी...

DMF फंड पर CAG का बड़ा ‘प्रहार’: ₹4,536 करोड़ खर्च, फिर भी 44% खनन प्रभावित गांव विकास से दूर

छत्तीसगढ़ के DMF फंड के उपयोग पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की गंभीर टिप्पणी, योजना चयन से लेकर निगरानी तक कई खामियां उजागर

Advertisement

रायपुर, 16 July (IndustrialPunch Desk) : छत्तीसगढ़ में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए जिला खनिज संस्थान न्यास (District Mineral Foundation-DMF) की कार्यप्रणाली पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अपनी ताजा प्रदर्शन लेखापरीक्षा (Performance Audit) रिपोर्ट में CAG ने खुलासा किया है कि ₹4,536 करोड़ से अधिक राशि खर्च होने के बावजूद राज्य के 44 प्रतिशत खनन प्रभावित गांवों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया।

इसे भी पढ़ें: कोयला कारोबार में ऐतिहासिक बदलाव: भारत में Coal Exchange का रास्ता खुला, आवेदन शुरू

रिपोर्ट के अनुसार, जिन गांवों को खनन गतिविधियों के कारण सबसे अधिक प्रभावित माना गया था, उनमें से बड़ी संख्या आज भी मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों से वंचित है। CAG ने इसे DMF फंड के उद्देश्य के विपरीत बताया है।

क्या है DMF?

Advertisement

जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की स्थापना खनिज एवं खनन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए खनन कंपनियों से निर्धारित राशि लेकर संबंधित जिलों में विकास कार्य किए जाते हैं।

रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं और कमियों की ओर संकेत किया गया है :

  • ₹4,536 करोड़ खर्च होने के बावजूद 44% खनन प्रभावित गांव योजनाओं के लाभ से बाहर रहे।
  • कई जिलों में परियोजनाओं का चयन वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं के बजाय अन्य आधारों पर किया गया।
  • कई विकास कार्य ऐसे क्षेत्रों में कराए गए, जो सीधे तौर पर खनन से प्रभावित नहीं थे।
  • ग्राम सभाओं की भागीदारी और स्थानीय आवश्यकताओं के आकलन में कमी पाई गई।
  • परियोजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था नहीं मिली।
  • कई स्थानों पर रिकॉर्ड संधारण और वित्तीय प्रबंधन में भी कमियां सामने आईं।

योजना के मूल उद्देश्य पर उठे सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि DMF का उद्देश्य खनन प्रभावित समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाना था, लेकिन योजना के क्रियान्वयन में कई स्तरों पर कमियों के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। इससे यह सवाल उठता है कि बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुंचा।

पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की सिफारिश

  • खनन प्रभावित गांवों की वैज्ञानिक एवं अद्यतन पहचान।
  • ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • परियोजनाओं का चयन निर्धारित प्राथमिकताओं के आधार पर करना।
  • कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और थर्ड पार्टी मूल्यांकन।
  • ऑनलाइन निगरानी एवं वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करना।
  • DMF निधि के उपयोग में जवाबदेही बढ़ाना।

खनन जिलों पर सबसे अधिक असर

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। कोरबा, रायगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कबीरधाम, जशपुर और बस्तर जैसे जिलों में DMF के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे में CAG की रिपोर्ट इन जिलों में DMF योजनाओं के क्रियान्वयन पर नई बहस छेड़ सकती है।

सरकार की जिम्मेदारी बढ़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि CAG की टिप्पणियां केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का संकेत भी हैं कि खनन प्रभावित लोगों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए निगरानी और योजना निर्माण की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

इसे भी पढ़ें: BRICS मंच पर गूंजी Coal India की आवाज, SECL ने दुनिया के सामने पेश किया भारत का HR मॉडल

Industrial Punch Analysis

DMF फंड देश के सबसे बड़े सामाजिक विकास कोषों में से एक माना जाता है। यदि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी बड़ी संख्या में खनन प्रभावित गांव विकास से वंचित रह जाते हैं, तो यह केवल वित्तीय प्रबंधन का नहीं बल्कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का भी गंभीर प्रश्न है। CAG की यह रिपोर्ट आने वाले समय में DMF फंड की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नीति स्तर पर बड़े सुधारों का आधार बन सकती है।

industrial punch is now on Whatsapp Channels. Click here to join

IndustrialPunch | The Voice of Industry & Workforce

Advertisement
कोल इंडिया की 10 मेगा माइंस ने Q1 में बनाया रिकॉर्ड, SECL, NCL और MCL की खदानों का दबदबा भारत के सर्वाधिक कोयला भंडार वाले सात राज्यों के बारे में जानें: वित्तीय वर्ष 2025- 26 : कोल इंडिया लिमिटेड की टॉप- 10 खदान कोल इंडिया ने डिस्पैच का टारगेट भी किया कम, देखें 2026- 27 का कंपनीवार नया लक्ष्य कोल इंडिया ने घटाया लक्ष्य, देखें 2026- 27 का कंपनीवार नया टारगेट