कोरबा। IndustrialPunch : कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के कर्मचारियों के वर्ष 2026 के परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवार्ड (PLR) की राशि ₹1,10,250 तय होने के बाद इसका कुल वित्तीय असर भी बड़ा है। अप्रैल 2026 के कंपनीवार मैनपावर आंकड़ों के अनुसार कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों में 1,99,883 गैर-कार्यकारी कर्मचारी हैं। इन्हें ₹1,10,250 की दर से PLR देने पर करीब ₹2,203.71 करोड़ का अनुमानित वित्तीय भार बनता है।
PLR का लाभ केवल वर्तमान गैर-कार्यकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। निर्धारित नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच सेवानिवृत्त हुए करीब 8,351 पात्र कोलकर्मियों को भी इसका लाभ मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा सिंगरैनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के करीब 32 हजार कर्मचारियों के लिए भी PLR का प्रावधान है।
रिटायर्ड कोलकर्मियों और SCCL को जोड़ें तो ₹444.87 करोड़ अतिरिक्त
8,351 पात्र सेवानिवृत्त कोलकर्मियों और SCCL के करीब 32,000 कर्मचारियों को मिलाकर करीब 40,351 अतिरिक्त लाभार्थी बनते हैं। यदि इन सभी के लिए भी ₹1,10,250 की समान राशि मानकर गणना की जाए तो अतिरिक्त वित्तीय भार करीब ₹444.87 करोड़ बैठता है।
इस तरह वर्तमान 1,99,883 गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के अनुमानित ₹2,203.71 करोड़ में सेवानिवृत्त कोलकर्मियों और SCCL कर्मचारियों के अनुमानित ₹444.87 करोड़ को जोड़ने पर कुल संभावित PLR राशि करीब ₹2,648.58 करोड़ पहुंचती है।
PLR का बड़ा गणित
- CIL Non-Executive: 1,99,883
- पात्र सेवानिवृत्त कोलकर्मी: करीब 8,351
- SCCL कर्मचारी: करीब 32,000
- कुल संभावित लाभार्थी: करीब 2,40,234
- प्रति कर्मचारी PLR: ₹1,10,250
- CIL Non-Executive पर अनुमानित भार: ₹2,203.71 करोड़
- रिटायर्ड + SCCL पर अनुमानित भार: ₹444.87 करोड़
- कुल संभावित PLR राशि: ₹2,648.58 करोड़
कंपनीवार CIL में सबसे ज्यादा भार ECL पर
अप्रैल 2026 के मैनपावर आंकड़ों के अनुसार ECL में 43,330, BCCL में 29,314, CCL में 30,459, WCL में 29,533, SECL में 34,267, MCL में 18,970, NCL में 11,434, CMPDIL में 1,867, NEC में 448 और CIL मुख्यालय में 261 गैर-कार्यकारी कर्मचारी हैं।
₹1,10,250 प्रति कर्मचारी की दर से अनुमानित भार में ECL करीब ₹477.71 करोड़ के साथ सबसे आगे है। इसके बाद SECL ₹377.79 करोड़, CCL ₹335.81 करोड़, WCL ₹325.60 करोड़ और BCCL ₹323.19 करोड़ के अनुमानित भार के साथ प्रमुख कंपनियां हैं।
त्योहार से पहले बाजार में पहुंचेगा हजारों करोड़ का पैसा
PLR की यह राशि ऐसे समय में कर्मचारियों के हाथों में पहुंचेगी, जब देश में त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू हो चुका है। बोनस का एक हिस्सा वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, घरेलू सामान, बच्चों की जरूरतों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद पर खर्च होने की संभावना है।
इससे कोयला क्षेत्रों के बाजारों को सीधा फायदा मिल सकता है। कोरबा, धनबाद, रांची, सिंगरौली, नागपुर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में त्योहारी कारोबार को PLR से अतिरिक्त गति मिलने की उम्मीद है।
हालांकि पूरी PLR राशि बाजार में खर्च होगी, ऐसा कहना उचित नहीं होगा। कर्मचारियों की ओर से इसका एक हिस्सा बचत, निवेश, कर्ज भुगतान और अन्य जरूरतों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
₹2,648 करोड़ का PLR सिर्फ बोनस नहीं, बड़ा आर्थिक बूस्टर
इस गणना से साफ है कि ₹1,10,250 का PLR कोयला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बड़ा नकदी प्रवाह पैदा कर सकता है। केवल अप्रैल 2026 के CIL Non-Executive manpower के आधार पर करीब ₹2,203.71 करोड़ का अनुमानित भार है। पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों और SCCL को जोड़ने पर यह संभावित राशि बढ़कर करीब ₹2,648.58 करोड़ हो जाती है।
यानी कोल इंडिया और SCCL से जुड़े कर्मचारियों के लिए यह बोनस भुगतान त्योहारी सीजन में बाजार के लिए भी एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है।
नोट: ₹2,648.58 करोड़ का आंकड़ा एक अनुमान है। इसमें 1,99,883 CIL Non-Executive कर्मचारियों, करीब 8,351 पात्र सेवानिवृत्त कोलकर्मियों और करीब 32,000 SCCL कर्मचारियों पर ₹1,10,250 की समान राशि लागू करके गणना की गई है। वास्तविक भुगतान पात्रता, लागू नियमों और प्रो-राटा व्यवस्था के अनुसार अलग हो सकता है।
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