Tuesday, September 22, 2026
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SECL को मिला जल संरक्षण के लिए “वॉटर डाइजेस्ट अवार्ड”

यह पुरस्कार जल संरक्षण के प्रयासों एवं कोयला खदानों से निकलने वाले जल के सदुपयोग के लिए प्रदान किया गया है।

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बिलासपुर, 16 मार्च। कोल इंडिया की अनुषांगिक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) को वॉटर डाइजेस्ट अवार्ड (Water Digest अवार्ड) से नवाजा गया है।

गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के कर कमलों से एसईसीएल को प्रदान किया गया। कार्यक्रम में इज़रायल के राजदूत व सिस्टर शिवनी की भी उपस्थिति रही। यह कार्यक्रम यूनेस्को(UNESCO) के साथ भागीदारी में आयोजित था। नई दिल्ली में आयोजित उक्त समारोह में एसईसीएल के प्रतिनिधि मण्डल में श्री मानस साहू मुख्यप्रबंधक (सिविल) शामिल रहे।

एसईसीएल को यह पुरस्कार जल संरक्षण के प्रयासों एवं कोयला खदानों से निकलने वाले जल के सदुपयोग के लिए प्रदान किया गया है।

पूरे एसईसीएल की बात करें तो वर्ष 22-23 में फरवरी’23 तक लगभग 735.07 लाख किलोलीटर पानी एसईसीएल की विभिन्न खदानों से निकला है। इसमें से लगभग 262.26 किलोलीटर पानी को स्थानीय लोगों के प्रयोग के लिए प्रदाय किया गया है। जहां 25.70 किलोलीटर पानी का पेयजल के रूप में इस्तेमाल हुआ है वहीं लगभग 236.56 किलोलीटर पानी को 2,852 एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए प्रयोग किया गया है। खदान से निकले जल से 142 गाँवों की लगभग 61,000 आबादी लाभान्वित हुई है।

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विदित हो कि खदानों से कोयला निकाले जाने की प्रक्रिया के दौरान माइन संप्स में भारी मात्र में पानी एकत्रित हो जाता है। खनन को सुचारु रूप से चलाने के लिए इस पानी को पंप की सहायता से बाहर सतह पर निकाला जाता है। खानों में जल संचयन मुख्यतः दो प्रकार से होता है। पहला भूमिगत खदानों में खनन के दौरान जल स्रोतों के कटाव के कारण। दूसरा खुली खदानों में जल स्रोतों के कटाव और वर्षा जल के एकत्रित होने के कारण।

खदानों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए भी एसईसीएल सजगता से काम रही है। 17 रियल टाइम इफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम्स की मदद से खदान से निकलने वाले जल की गुणवत्ता की लगातार जांच की जाती है।

एसईसीएल जोहिला क्षेत्र में पिपरिया जल आपूर्ति (सिंचाई) योजना के माध्यम से पिपरिया भूमिगत खदान से प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 21.60 लाख गैलन पानी को उपचारित करने के बाद पिपरिया और सिमरिया गावों तक पहुंचाया जा रहा है। यह पानी यहाँ की लगभग 600 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए प्रयोग में लिया जा रहा है जिससे यहाँ रहने 1500 ग्रामवासी लाभान्वित हो रहे हैं। जोहिला क्षेत्र में ही जमुनिया जल आपूर्ति (पेयजल एवं सिंचाई) योजना के अंतर्गत उमरिया भूमिगत खदान से प्रतिदिन निकलने वाले 28.80 लाख गैलन पानी को उपचार के पश्चात जमुनिया, सरहाटोला, लालपुर, बिलाईकाप जैसे गांवों की लगभग 5000 आबादी को पीने और सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ खदान से निकलने वाले पानी को उमरिया नगर पालिका के फिल्टर प्लांट को भी सप्लाई किया जाता है जोकि फिल्टर होने के बाद उमरिया जिले के रहवासियों को भेजा जाता है।

पानी जैसे दुर्लभ संसाधन को बचाने के लिए एसईसीएल ने जल संरक्षण का बीड़ा उठाया है। कंपनी खदान से निकलने वाले पानी के उपचार के लिए खुली खदानों में सेडिमेंटेशन टैंक/सेटलिंग तालाब बनाने पर काम कर रही है जो वॉटर रिचार्ज बेसिन के रूप में काम करते हैं।

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