Friday, July 3, 2026
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कोयला मंत्रालय का दावा, कोल गैसिफिकेशन योजना से 50 हजार नौकरियां मिलेंगी

कोल गैसीफिकेशन एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें कोयले को नियंत्रित प्रक्रिया के माध्यम से गैस में परिवर्तित किया जाता है

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नई दिल्ली। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी कोल गैसीफिकेशन (Coal Gasification) योजना देश के कोयला क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इस योजना के माध्यम से कोयले को केवल ईंधन के रूप में उपयोग करने के बजाय उसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित किया जाएगा।

सरकार का अनुमान है कि इस पहल से देश के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

कोल गैसीफिकेशन एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें कोयले को नियंत्रित प्रक्रिया के माध्यम से गैस में परिवर्तित किया जाता है। इस गैस का उपयोग मेथनॉल, अमोनिया, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG), हाइड्रोजन, उर्वरक, रसायन और अन्य उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इससे कोयले का अधिक प्रभावी और मूल्यवर्धित उपयोग संभव हो सकेगा।

रोजगार और उद्योग को मिलेगा लाभ

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विशेषज्ञों के अनुसार कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के शुरू होने से केवल संयंत्रों में ही रोजगार नहीं बढ़ेगा, बल्कि कोयला खनन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग, मशीन निर्माण, उपकरण आपूर्ति, रखरखाव और सहायक उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे कोयला उत्पादक राज्यों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

आयात पर निर्भरता होगी कम

भारत वर्तमान में कई औद्योगिक रसायनों और गैस आधारित उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर है। कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के विस्तार से मेथनॉल, अमोनिया और अन्य रासायनिक उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा एवं औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय क्षेत्रों का होगा विकास

कोयला क्षेत्रों में स्थापित होने वाले गैसीफिकेशन संयंत्रों के कारण सड़क, बिजली, जल आपूर्ति, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं का विकास होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार, छोटे कारोबारियों को नए अवसर और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को स्थायी लाभ मिलने की संभावना है।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल

सरकार का मानना है कि कोल गैसीफिकेशन केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति देने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। कोयले से उच्च मूल्य वाले उत्पादों का निर्माण बढ़ने से भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के साथ-साथ स्वदेशी औद्योगिक क्षमता को भी मजबूत कर सकेगा।

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