Thursday, October 8, 2026
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नाथूलाल बोले- JBCCI के लिए कोयला मंत्रालय पर दबाव बनाने की जरूरत, बोनस पर यह कहा

धारा 14 के प्रभाव से छूट के संबंध में जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि JBCCI- XII का गठन हो और NCWA-XII की वेतन वार्ता शुरू की जा सके

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कोरबा। IndustrialPunch : कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में 12वें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते (NCWA-XII) के लिए JBCCI- XII के गठन को लेकर गतिविधियां तेज होने के बीच औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 14 का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। इसी बीच HMS के वरिष्ठ नेता नाथूलाल पाण्डेय ने कहा है कि JBCCI- XII के गठन का रास्ता साफ करने के लिए कोयला मंत्रालय पर दबाव बनाए जाने की जरूरत है।

industrialpunch.com से चर्चा करते हुए पाण्डेय ने कहा कि कोयला मंत्रालय को Industrial Relations Code की धारा 14 के प्रभाव से छूट के संबंध में जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि JBCCI- XII का गठन हो और NCWA-XII की वेतन वार्ता शुरू की जा सके। उनके मुताबिक नई वेतन वार्ता में कोयला कामगारों के वेतनमान के साथ अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी के मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।

धारा 14 क्यों बनी चर्चा का विषय?

Industrial Relations Code, 2020 की धारा 14 में किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान में कर्मचारियों की ओर से प्रबंधन के साथ बातचीत के लिए Negotiating Union अथवा Negotiating Council की व्यवस्था की गई है।
प्रावधान के अनुसार, यदि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान में एक से अधिक पंजीकृत ट्रेड यूनियन हैं और किसी एक यूनियन को 51 प्रतिशत या उससे अधिक कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त है, तो उसे Sole Negotiating Union के रूप में मान्यता दी जा सकती है।

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वहीं, यदि किसी यूनियन को 51 प्रतिशत समर्थन हासिल नहीं है, तो Negotiating Council के गठन का प्रावधान है। इसमें कम से कम 20 प्रतिशत समर्थन वाली ट्रेड यूनियनों को प्रतिनिधित्व मिलने तथा प्रत्येक 20 प्रतिशत समर्थन पर एक प्रतिनिधि का प्रावधान बताया गया है।

यही व्यवस्था अब कोल इंडिया में वर्षों से चली आ रही उद्योग-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता प्रणाली और JBCCI के गठन के संदर्भ में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

CIL की छूट की मांग क्यों महत्वपूर्ण?

CIL की ओर से धारा 14 के प्रभाव से छूट के लिए कोयला मंत्रालय को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है। इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यदि संबंधित प्रावधान के अनुप्रयोग से छूट मिलती है, तो मौजूदा उद्योग-स्तरीय द्विपक्षीय व्यवस्था के आधार पर JBCCI- XII के गठन का रास्ता स्पष्ट करने की गुंजाइश बन सकती है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु है—धारा 14 स्वयं छूट देने वाली धारा नहीं है। यह Negotiating Union और Negotiating Council की व्यवस्था करती है। इसलिए CIL की मांग को धारा 14 के अनुप्रयोग से छूट के अनुरोध के रूप में समझना अधिक उचित होगा।

JBCCI- XII के गठन को लेकर यूनियनों की सक्रियता

JBCCI- XII का गठन लंबे समय से कोयला श्रमिक संगठनों के प्रमुख एजेंडे में है। यूनियनों की मांग है कि नए वेतन समझौते की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए, ताकि NCWA-XII के तहत वेतन एवं अन्य सेवा सुविधाओं पर बातचीत आगे बढ़ सके।

2 सितंबर की Apex JCC बैठक में Labour Codes के क्रियान्वयन सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बैठक में BMS, HMS, AITUC और CITU के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। JBCCI- XII का नाम आधिकारिक एजेंडे में सीधे शामिल नहीं था, लेकिन बैठक के दौरान इसके गठन को लेकर चर्चा हुई और CIL प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोयला मंत्रालय को पत्र भेजने की बात सामने आई थी।

बोनस पर भी HMS नेता का हमला

नाथूलाल पाण्डेय ने हाल में तय ₹1,10,250 के PLR पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कोयला कामगारों को इससे अधिक बोनस मिलना चाहिए था।

HMS नेता के अनुसार, जब कोल इंडिया प्रबंधन अधिकारियों को PRP देने के लिए राशि उपलब्ध करा सकता है, तो कोयला कामगारों के लिए भी अधिक बोनस की व्यवस्था होनी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रबंधन पर पर्याप्त दबाव बनाया जाता तो ₹1,15,000 तक बोनस हासिल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि वे कोयला कामगारों के हितों से समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं और कर्मचारियों के हितों के लिए आगे भी आवाज उठाते रहेंगे।

अब मंत्रालय के रुख पर नजर

NCWA-XI की अवधि समाप्त होने के बाद NCWA-XII के लिए नई वार्ता प्रक्रिया शुरू कराने की दिशा में JBCCI-12 का गठन महत्वपूर्ण पड़ाव है। ऐसे में धारा 14 के तहत Negotiating Union/Negotiating Council की व्यवस्था और CIL की छूट की मांग के बीच अब कोयला मंत्रालय के निर्णय पर नजर बनी हुई है।
यदि छूट संबंधी मांग स्वीकार होती है, तो JBCCI-XII की प्रक्रिया को मौजूदा उद्योग-स्तरीय द्विपक्षीय व्यवस्था के अनुरूप आगे बढ़ाने का रास्ता अधिक स्पष्ट हो सकता है। वहीं, यदि धारा 14 के प्रावधानों को लागू करने की स्थिति बनती है, तो प्रतिनिधित्व और वार्ता की संरचना को लेकर अलग प्रक्रिया सामने आ सकती है।

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