K Lakshma Reddy
K Lakshma Reddy
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कोरबा, 19 जून। जेबीसीसीआई- XII के गठन के लिए सीआईएल प्रबंधन पर दबाव बनाने श्रमिक संगठनों ने कमर कसनी शुरू करा दी है। इस मांग को लेकर एक जुलाई को प्रदर्शन की तैयारी है। इधर, भारतीय मजदूर संघ ने इस प्रदर्शन से किनारा कर लिया है।

यहां बताना होगा कि कोल इंडिया के कामगारों के वेतन, भत्तों, सेवा शर्तों और कल्याणकारी सुविधाओं पर समझौता करने के लिए सर्वाेच्च द्विपक्षीय समिति यानी JBCCI- XII (Joint Bipartite Committee for the Coal Industry) का गठन किया जाना है। 30 जून को राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता- XII (NCWA) की अवधि समाप्त हो रही है। जेबीसीसीआई द्वारा एनसीडब्ल्यूए- XII का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

5 जून को कोलकाता स्थित कोल इंडिया मुख्यालय में आयोजित हुई एपेक्स जेसीसी की बैठक में जेबीसीसीआई- XII के गठन का मुद्दा चारों यूनियन बीएमएस, एचएमएस, सीटू, एटक के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से उठाया था। सीआईएल प्रबंधन ने कहा था कि इस संदर्भ में कोयला मंत्रालय से चर्चा की जाएगी। दरअसल चार लेबर कोड्स और जबलपुर हाईकोर्ट के एक निर्णय के कारण जेबीसीसीआई का गठन का मामला लंबित होता दिख रहा है।

एपेक्स जेसीसी की बैठक के दौरान ही चारों यूनियन के नेताओं ने यह तय किया था कि एक जुलाई को कोल इंडिया और अनुषांगिक कंपनी स्तर पर जेबीसीसीआई- XII के गठन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा। ताकि प्रबंधन पर दबाव बनाया जा सके। एक जुलाई के प्रदर्शन के लिए इंटक को भी विश्वास में लिया गया है।

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एचएमएस, सीटू, एटक, इंटक ने एक जुलाई के प्रदर्शन के लिए कमर कस ली है। इसके तहत गेट मीटिंग, रैली, प्रदर्षन करते हुए जेबीसीसीआई- XII के गठन की मांग की जाएगी।

इधर, सूत्रों ने बताया है कि भारतीय मजदूर संघ ने एक जुलाई के प्रदर्शन से किनारा कर लिया है। बताया गया है कि बीएमएस के प्रभारी के. लक्ष्मा रेड्डी विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं है। उन्हें लगता है कि ऐसा करना सरकार का विरोध करना होगा। उन्होंने इस संदर्भ में एचएमएस नेता हरभजन सिंह सिद्धू को अपने निर्णय से अवगत करा दिया है।

यानी बीएमएस ने हमेशा की तरह एकजुट रहने के बजाए अलग रास्ते पर जाने का फैसला लिया है। जबकि बीएमएस से सम्बद्ध यूनियन अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ (ABKMS) द्वारा जेबीसीसीआई गठन की मांग निरंतर दोहराई जा रही है, लेकिन अन्य यूनियन के साथ एक मंच पर आकर जेबीसीसीआई गठन की मांग करने से परहेज किया जा रहा है।

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