Friday, July 3, 2026
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नागपुर फैक्ट्री विस्फोट जांच में नया मोड़, SBL Energy पर अमेरिकी प्रतिबंधों से बढ़ी जांच की गंभीरता

जांच एजेंसियां अब कंपनी के संचालन, सुरक्षा मानकों, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य राज्यों से जुड़े कारोबारी संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं।

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Nagpur factory blast  : रायपुर/नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड (SBL Energy Limited) के विस्फोटक कारखाने में 1 मार्च 2026 को हुए भीषण विस्फोट की जांच अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। राउलगांव स्थित फैक्ट्री में हुए इस हादसे में 25 श्रमिकों की मौत हुई थी। जांच एजेंसियां अब कंपनी के संचालन, सुरक्षा मानकों, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य राज्यों से जुड़े कारोबारी संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं।

जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। हाल ही में अमेरिकी वित्त विभाग (U.S. Treasury Department) के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने सूडान में जारी गृहयुद्ध से जुड़े कथित नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए SBL Energy Limited, उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आलोक चौधरी सहित कुल आठ व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि SBL Energy ने सूडान स्थित Target Multiactivities Company Ltd. (TMAC) को 200 से अधिक खेपों में विस्फोटक एवं विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति की, जिनका उपयोग सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) के हथियार भंडार में किया गया। अमेरिका का दावा है कि इससे सूडान के गृहयुद्ध को बढ़ावा मिला और मानवीय संकट और गंभीर हुआ।

इधर, छत्तीसगढ़ में वर्ष 2024 में बेमेतरा स्थित विस्फोटक फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे के बाद भी कंपनी का नाम चर्चा में आया था। अब नागपुर विस्फोट की जांच के दौरान एजेंसियां दोनों मामलों के बीच संभावित तकनीकी, व्यावसायिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों ने दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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वहीं, अमेरिकी प्रतिबंधों पर SBL Energy Limited ने सार्वजनिक रूप से अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह भारतीय कानूनों और निर्यात संबंधी सभी नियमों का पालन करती है तथा वह अपने पक्ष को संबंधित मंचों पर प्रस्तुत करेगी।

फिलहाल नागपुर विस्फोट मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रिपोर्ट, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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