अंबिकापुर, 3 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित एसईसीएल (SECL) की अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस के विस्तार का विरोध हो रहा है। बुधवार को ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। हमले में एएसपी, थाना प्रभारी सहित करीब 25 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

बुधवार को कंपनी द्वारा ग्राम परसोड़ीकला में कोल का खनन किया जा रहा था। इसी बीच ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा, इसमें महिलाएं भी थीं। उन्होंने खदान विस्तार का विरोध किया। ग्रामीण लाठी- डंडे से लैस थे। विरोध को देखते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात कर रखा था। देखते ही देखते ग्रामीणों ने पुलिस बल पर पथराव शुरु कर दिया। पुलिस ने भी लाठियां भांजी। हालात को काबू करने पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
झड़प में एएसपी, थाना प्रभारी सहित करीब 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए। 12 से ज्यादा ग्रामीणों को भी चोट आई है। थाना प्रभारी को अंबिकापुर रेफर कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक एसईसीएल के अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी गांव की जमीन साल 2001 में अधिग्रहित की गई है। ग्रामीण अपनी जमीन देने तैयार नहीं हैं। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी करीब 500 की संख्या में पुलिस बल के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए पहुंचे थे।
एसईसीएल ने खदान के संचालन का जिम्मा एलसीसी (LCC) कंपनी को दिया है। एलसीसी कंपनी का करोड़ों रुपए का इन्वेस्टमेंट है। काम बंद होने से कंपनी को नुकसान हो रहा है, इसलिए वह जल्दी से जल्दी जमीन पर कब्जा चाहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी कुछ अधिकारियों की मदद लेकर उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है।

मामले में पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने स्पष्ट कहा है कि यदि ग्रामीण चाहते हैं कि खदान न खुले तो नहीं खुलेगी। राज्य अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण नियमों के तहत कोई भी कंपनी 5 सालों तक अधिग्रहित भूमि पर काम नहीं करती है तो जमीनें भू स्वामियों को वापस कर दी जाएंगी। किसी की मर्जी के बिना उसकी जमीन नहीं ली जा सकती। यदि ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं लिया है तो उनकी जमीनें अधिग्रहित नहीं मानी जाएगी। यह नियम विरूद्ध है। इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
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