नई दिल्ली, 23 जुलाई। सरकारी सेवा में लगे करोड़ों लोगों की नजरें एक बार फिर वेतन आयोग की ओर टिकी हैं। सरकार ने भले ही अभी 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की हो, लेकिन इस संबंध में तैयारियां तेज हो चुकी हैं। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने आयोग के लिए अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी हैं। इधर, मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में भी 8वें वेतन आयोग के लेकर सवाल उठा।
राज्यसभा में पूछा गया था कि आठवें वेतन आयोग के लिए विचारार्थ विषय तैयार करने हेतु संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र की राष्ट्रीय परिषद् (एनसी-जेसीएम) से कोई सुझाव प्राप्त हुआ है, यदि हां, तो परिषद् के मुख्य सुझाव क्या हैं। क्या सरकार इन सुझावों पर विचार कर रही है;
इस संदर्भ में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब में बताया कि संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र की राष्ट्रीय परिषद (एनसी-जेसीएम) से सुझावों प्राप्त हुए हैं। इसी तरह रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग और राज्यों सहित प्रमुख हितधारकों से इनपुट मांगे गए हैं।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के माध्यम से सचिव स्टाफ साइड एनसी (जेसीएम) द्वारा अग्रेषित 8वें केन्द्रीय वेतन आयोग के लिए विचारार्थ विषय इस प्रकार हैं :
क. निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य लाभों/सुविधाओं, पेंशन/ग्रेच्युटी और अन्य सेवोपरांत लाभों आदि की मौजूदा संरचना की जांच करनाः-
1. केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी।
2. अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित कार्मिक।
3. रक्षा बलों और अर्धसैनिक बलों से संबंधित कार्मिक।
4. डाक विभाग से संबंधित ग्रामीण डाक सेवक कहलाने वाले कार्मिक।
5. केंद्र शासित प्रदेशों के कार्मिक।
6. भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी।
7. उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और कर्मचारी।
8. संसद अधिनियम के तहत स्थापित विनियामक निकायों (आरबीआई को छोड़कर) के सदस्य।
9. केंद्र सरकार के स्वायत्त निकायों और संस्थानों के कर्मचारी।
ख. दिनांक 01.01.2026 तक उपर्युक्त (क) में उल्लिखित केंद्र सरकार के कर्मचारियों की श्रेणियों के लिए व्यापक संशोधित वेतनमान पर विचार करना।
ग. आयोग, विकास और जीवन की आवश्यकताओं, जिसमें पिछले 65 वर्षों में काफी परिवर्तन हुआ है और दिनांक 01.01.2026 तक न्यूनतम वेतन निर्धारित करने के संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों पर विचार करने के लिए डॉ. एक्रोयड फार्मूला में संशोधन करते हुए 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन (1957) की सिफारिश के संदर्भ में “उचित और सम्मानजनक जीवनयापन वेतन“ के रूप में न्यूनतम वेतन प्रदान करने को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना, लाभ, सुविधाएं, सेवानिवृत्ति लाभ, कल्याणकारी मामलों आदि का निर्धारण करेगा। आयोग वर्ष 2019 में राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी नीति निर्धारित करने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के अनुसार खपत इकाइयों को 03 परिवार इकाइयों से बढ़ाकर 3.6 परिवार इकाइयों तक करने पर भी विचार करे।
घ. 8 वें केन्द्रीय वेतन आयोग द्वारा अव्यवहार्य वेतनमानों जैसे लेवल-1 का लेवल-2 के साथ और लेवल-3 का लेवल-4 के साथ तथा लेवल-5 का लेवल-6 के साथ विलय करने पर विचार किया जाना चाहिए।
ङ. एमएसीपी योजना में मौजूदा विसंगतियों पर विचार करना और सुस्पष्ट पदानुक्रमिक संरचना के साथ सेवा में न्यूनतम 3 पदोन्नतियों तथा पदोन्नति पदानुक्रम में एमएसीपी की सिफारिश करना।
च. उपरोक्त (क) में उल्लिखित केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तत्काल स्वीकृत की जाने वाली अंतरिम राहत निर्धारित करना।
छ. वेतन और पेंशन में तत्काल विलय किए जाने वाले महंगाई भत्ते/महंगाई राहत का प्रतिशत निर्धारित करना।
ज. विसंगति समिति की बैठकों और संयुक्त परामर्शदात्री प्रणाली (जेसीएम) की बैठकों में कर्मचारी पक्ष द्वारा उठाई गई 7वें वेतन आयोग की विभिन्न विसंगतियों का समाधान करना।
झ. पेंशन, मृत्यु सह सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन, 12 वर्षों के उपरांत पेंशन के परिवर्तित हिस्से की बहाली, प्रत्येक 5 वर्षों के पश्चात पेंशन में वृद्धि हेतु संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का कार्यान्वयन, पूर्व एवं भावी पेंशनभोगियों के बीच समानता जैसे मौजूदा सेवानिवृत्ति लाभों में आवश्यक सुधारों पर कार्य करना।
ञ. दिनांक 1/1/2004 या उसके उपरांत भर्ती किए गए केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सीसीएस (पेंशन नियम) 1972 (अब 2021) के अंतर्गत परिभाषित और गैर-अंशदायी पेंशन योजना की समीक्षा करना और उसे बहाल करना।
ट. सीजीएचएस से संबंधित मामले एफएमए पर संसदीय स्थायी समिति की अनुशंसाओं की सिफारिश करना तथा डाक पेंशनभोगियों सहित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कैशलेस/परेशानी मुक्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने की कार्यविधि की सिफारिश करना।
ठ. स्नातकोत्तर स्तर तक बाल शिक्षा भत्ता और छात्रावास सब्सिडी की समीक्षा करना और उसकी सिफारिश करना।
ड. वर्तमान परिस्थितियों में ऐसे आवश्यक अग्रिमों की समीक्षा करना और उन्हें शुरू करने की सिफारिश करना तथा साथ ही समाप्त किए गए अग्रिमों को बहाल करना।
ढ. 365 दिनों में चौबीसों घंटे काम करने वाले रेलवे कर्मचारियों की ड्यूटी की प्रकृति में शामिल जोखिम और कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय रेल में सभी श्रेणियों के रेल कर्मचारियों को जोखिम और कठिनाई भत्ते के भुगतान पर विचार करना।
ण. हथियारों, गोलाबारूद, रसायनों, विस्फोटकों और एसिड इत्यादि के उत्पादन और भंडारण में शामिल अत्यधिक चिरकालिक, जोखिमपूर्ण और खतरनाक कार्य परिस्थितियों पर विचार करना तथा विशेष जोखिम भत्ता, बीमा सुरक्षा, क्षतिपूर्ति आदि की सिफारिश करना।









