Advertisement

कोरबा, 26 अगस्त। 25 साल बाद एल्यूमिनियम पार्क (Aluminium Park) के विकसित होने का रास्ता साफ हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी ने कोरबा स्थित बंद हो चुके पॉवर प्लांट की जमीन को हस्तांतरित करने मंजूरी दे दी है।

विद्युत उत्पादन कंपनी के बोर्ड ने बंद हो चुके कोरबा पूर्व संयंत्र की ज़मीन एल्यूमिनियम पार्क के लिए हस्तांतरित करने मंजूरी दी है। इस मंजूरी के बाद 105 हेक्टेयर ज़मीन उद्योग विभाग हस्तांतरित होने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए विद्युत उत्पादन कंपनी बोर्ड ने प्रबंध निदेशक को अधिकृत किया है। जिला प्रशासन, नजुल, राजस्व विभाग को ज़मीन का सत्यापन एवं सीमांकन कर उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने के लिए ऊर्जा विभाग द्वारा नजूल अधिकारी को पत्र जारी किया गया है।

इसे भी पढ़ें : कोल इंडिया के 25 अस्पताल स्टेट हेल्थ अथॉरिटी को ट्रांसफर

एल्यूमिनियम पार्क के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए वाणिज्य, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम और आबकारी, श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा प्रयास किया जा रहा था। श्री देवांगन ने कोरबा पूर्व संयंत्र की जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव ऊर्जा विभाग और उद्योग विभाग को दिया था। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024- 25 के बजट में एल्यूमिनियम पार्क के लिए 5 करोड़् रुपए का प्रावधान किया था।

Advertisement

अजीत जोगी लाए थे एल्यूमिनियम पार्क का कॉन्सेप्ट

यहां बताना होगा कि 2001 में कोरबा जिले में एल्यूमिनियम पार्क विकसित करने का कॉन्सेप्ट छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने लाया था। 2003 में डा. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनने के बाद भी एल्यूमिनियम पार्क की योजना को बरकरार रखा गया।

बालको के साथ हुआ था MoU

रमन सरकार और भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (Balco) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के तहत बालको द्वारा लुघ उद्योगों को कच्चे एल्यूमिनियम की खरीदी पर रियायत दी जानी थी और राज्य शासन द्वारा एल्यूमिनियम से संबंधित उत्पाद तैयार करने की लागत में सब्सिडी।

पहले नुनेरा में जमीन की गई थी चिन्हांकित

एल्यूमिनियम पार्क के लिए 140 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई, जहां एल्यूमिनियम से संबंधित उत्पाद तैयार करने वाले लघु उद्योग लगाए जाते। 2005 में कलेक्टर गौरव द्विवेदी ने पाली ब्लॉक के ग्राम नुनेरा में एल्यूमिनियम पार्क के लिए जमीन का चिन्हांकन किया था, लेकिन बड़े झाड़ के कारण इसका अधिग्रहण नहीं हो सका।

कलेक्टर रीना बाबा कंगाले के कार्यकाल में बालको के समीप ग्राम रोकबहरी में जमीन की तलाश की गई। ग्राम सभा का आयोजन भी कराया गया, किंतु मामला आगे नहीं बढ़ सका। रिसदी में देबू की जमीन भी देखी गई और कलेक्टर ने शासन को इसका प्रस्ताव भेजा। देबू ने कोर्ट की शरण ले ली।

इसे भी पढ़ें : रेल मंत्रालय और एनटीपीसी ने फ्लाई ऐश के उपयोग और परिवहन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया

ठंडे बस्ते मेंं चली गई थी योजना

बाद में एल्यूमिनियम पार्क का मामला जमीन को लेकर उलझ गया और फिर पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई। भाजपा सरकार के 15 साल के कार्यकाल में एल्यूमिनियम पार्क प्रोजेक्ट के लिए प्रयास जरूर हुए, लेकिन इसे जमीन पर नहीं उतारा नहीं जा सका। कांग्रेस के भूपेश सरकार ने इस पर कोई काम नहीं किया।

यदि एल्यूमिनियम पार्क अस्तित्व में आता है तो निश्चित तौर पर इससे लघु उद्योगों में जान आएगी, रोजगार सृजित होंगे और जिले को आर्थिक लाभ मिलेगा।

industrial punch is now on Whatsapp Channels. Click here to join

Advertisement