कोरबा, 07 अक्टूबर (Industrial Punch Desk) : एसईसीएल के चिरमिरी ओपनकॉस्ट माइंस (SECL Chirmiri Mines accident) में समय से पहले हुए सीरियल ब्लॉस्ट की घटना प्रबंधन की बड़ी लापरवाही का परिणाम है। विस्फोट की चपेट में आ जाने से एसईसीएल के कर्मचारियों सहित 10 ठेका कामगार घायल हुए थे। मौके पर खड़े वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए।

यहां बताना होगा कि सोमवार, 06 अक्टूबर की दोपहर दो बजे करीब चिरमिरी ओपनकॉस्ट माइंस में यह हादसा हुआ था। जानकारी के मुताबिक एसईसीएल के कर्मचारी और ठेका कामगार ओपनकॉस्ट खदान में ब्लास्ट के लिए तैयारी के साथ पहुंचे थे। इनमें महिला कामगार भी सम्मिलित थीं। बलास्टिंग के लिए खदान के अपर फेस पर 20 होल किए गए। होल में बारुद डाल डेटोनेटर से जोड़ा गया। चार्ज करने से पूर्व एक अधिकारी का निर्देश मिला कि पहले लोवर फेस पर ब्लास्ट किया जाए। कामगार अधिकारी के निर्देश का पालन करते हुए लोवर फेस पर बलॉस्टिंग की तैयारी में जुट गए।

बताया गया है कि कि लोवर फेस पर 21 होल किए गए थे। लोवर फेस में बलॉस्टिंग की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद कामगार मौके पर मौजूद वाहनों को हटवाने के लिए आगे बढ़े। इसी दौरान अपर फेस में एक- एक कर बलॉस्टिंग शुरू हो गई। बड़े- बड़े पत्थर हवा में उछलते हुए गिरने लगे। मौके पर अफरा- तफरी मच गई। हादसे में कामगार घायल हो गए। वहां मौजूद वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। घायलों को रिजनल अस्पताल ले जाया गया। इनमें महिला कामगार भी थीं।
ये मजदूर हुए घायल
हसमत अली, मान कुंवर, मुलारो बाई, दुर्गावर्ती, हीरामणी, शंकर प्रसाद, मनोज दास, मान साय, रविशंकर और शिव कुमार।
हॉट स्टाटा है कारण, प्रबंधन की घोर लापरवाही : संजय सिंह

घटना के संदर्भ में industrialpunch.com ने कोल इंडिया सेफ्टी बोर्ड के सदस्य संजय सिंह से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस विस्फोट की मूल वजह हॉट स्टाटा थी। दरअसल चिरमिरी ओपनकॉस्ट माइंस जहां विस्फोट हुआ, वहां कोयले में आग लगी हुई है। इससे जमीन का तापमान अधिक है। अपर फेस में जिस स्थान पर ब्लॉस्टिंग के लिए होल किए गए थे, वहां तापमान लगभग 80 डिग्री था। इस कारण अपर फेस में सभी 20 होल में सीरियल ब्लास्ट हो गया।
संजय सिंह ने कहा कि यह घटना पूरी तरह प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम है। जबकि अपर फेस में होल कर बारुद डाल दिया गया था तो पहले वहां बलास्टिंग करनी थी। एक लंबा गेप देकर लोवर फेस में बलास्टिंग की तैयारी करने कामगारों से कहा गया। बारुद डालने के दो घण्टे के भीतर बलास्टिंग करना होता है। अपर फेस की जमीन गरम थी। प्रबंधन इस बात को जानता था, फिर भी होल में बारुद डालने के बाद उसे लंबी अवधि के लिए छोड़ दिया गया।
संजय सिंह ने कहा कि शुक्र था कि विस्फोट के सीधे चपेट में कोई नहीं आया अन्यथा लोगों के चिथड़े उड़ गए होते। श्री सिंह ने सब एरिया मैनेजर मनीष कुमार को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है। संजय सिंह ने मंगलवार को मौके का जायजा भी लिया।
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