नागपुर, 11 अक्टूबर। हिंद मजदूर सभा (HMS) से सम्बद्ध कोयला श्रमिक सभा ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) द्वारा इकाई से लेकर कंपनी स्तर तक आयोजित बैठकों और कार्यक्रमों का बहिष्कार किए जाने का ऐलान किया है। उठाए गए मुद्दों की ओर ध्यान नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
कोयला श्रमिक सभा जनरल सेक्रेटरी शरद धाण्डे ने इस आशय का पत्र डब्ल्यूसीएल के सीएमडी को लिखा है। पत्र में बताया गया है कि प्रबंधन खदानों में सुरक्षा मापदण्डों की निंरतर अनदेखी कर रहा है। जबकि कोयला श्रमिक सभा द्वारा बार- बार इस ओर ध्यानाकर्षित कराया जा रहा है।
कोयला श्रमिक सभा द्वारा खदानों में दुर्घटनाओें के गिनाए गए मुख्य कारक :
- किसानों से भूमि का कब्जा न मिल पाने के कारण अधिकारियों द्वारा खदान की सीमित भूमि से ही अधिक उत्पादन कर कोयला उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने की सनक में असुरक्षित रूप से कार्य कर दुर्घटनाओं को आमंत्रण देना।
- खान सुरक्षा निदेशालय द्वारा सुरक्षा संबंधी जारी दिशा निर्देशों का पूर्णतः उल्लंघन किया जाना।
- खुली खदानों में रौशनी की उचित व्यवस्था एवं भूमिगत खदानों में वेंटीलेशन तथा वर्किंग फेस में उचित सपोर्ट न किया जाना।
इन मुद्दों को भी उठाया :
- संपूर्ण वेकोलि में स्वास्थ्य सेवाओं में घोर लापरवाही एवं भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। अधिकारियों को बार- बार अवगत कराने के बावजूद कंपनी कॉलोनियों में पानी एवं शुद्ध पेयजल की उचित व्यवस्था करने में प्रबंधन विफल हो चुका है। जर्जर हो चुकी कंपनी आवासीय कॉलोनियों की मरम्मत एवं उसकी स्वच्छता का भी यही हाल है। कंपनी द्वारा कल्याण मद विभिन्न मिशनों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद धरातल पर परिणाम शून्य रहना तथा किये गये खर्चों का ऑडिट भी न कराना।
- अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों के बुधवार / रविवारीय एवं पीएच ड्यूटी में कटौती कर जानबूझकर कामगारों को परेशान करना और अपनी सुख सुविधाओं में लगातार वृदृधि करना।
- भू-आश्रितों के तहत रोजगार ग्रहिताओं को SOP के नाम पर जानबूझकर अनावश्यक रूप से ऐसी खदानों में पदस्थापित किया जाना जो पहले से ही लगभग 20 हजार प्रति टन घाटे में चल रही हैं। जिसके कारण कंपनी के उत्पादन व उत्पादकता को लगातार क्षति पहुंचाई जा रही है। उत्पादन में कमी तथा घाटे में बढ़ोतरी का ठिकरा बेकसूर मजदूरों पर फोड़ना।
- कंपनी के निदेशक तकनीकि जिनका मूल कार्य एवं प्रमुख जिम्मेदारी खदानों में उत्पादन व सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना है, वे मुख्यालय में बैठ कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेशों एवं कामगारों को प्रताड़ित करने के नये-नये हथकण्डे अपनाने में अपना ध्यान केन्द्रित किये हुए हैं।
- कंपनी के करोड़ों रूपये खर्च कर खदानों के विस्तार हेतु अधिग्रहित की गई भूमि में से लगभग 90 प्रतिशत किसानों / भू-आश्रितों को मुख्यालय में बैठे निष्क्रिय एवं भ्रष्ट अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण मुआवजा तथा नौकरी न दिये जाने पर खदान का विस्तार रूकने से सीमित जगह से ही अधिकारियों द्वारा सुरक्षा को ताक पर रख कर तथा दुर्घटनाओं को निमंत्रण देते हुए लगातार कोयला उत्पादन किया जा रहा है।
- कंपनी में बड़ी संख्या में कार्यरत ठेका मजदूरों को सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा एवं वेतन सुरक्षा प्रदान करने में कंपनी अधिकारियों का निष्क्रिय रहते हुए पूर्णतः विफल रहना।
- कंपनी में ठेका मजदूरों (माइनिंग/ नॉन माइनिंग) को बोनस दिये जाने संबंधी कोल इण्डिया द्वारा जारी आदेश के बावजूद इस दिशा में किसी प्रकार का ठोस कदम न उठाना जिसके कारण पिछले वर्ष 2024 के लगभग 70 प्रतिशत ठेका कामगारों को अभी तक बोनस न मिल पाना। साथ ही इस वर्ष 2025 में अभी तक एक भी ठेका कर्मचारी को बोनस न दिया जाना।
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