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chasnala mine accident : 27 दिसम्बर, 1975 का दिन। दोपहर करीब डेढ़ बजे थे। अचानक विस्फोटक होता है और तेज आवाज के साथ सत्तर लाख गैलन प्रति मिनट की दर से दामोदर का पानी भूमिगत खदान में समाहित होने लगता है। देखते ही देखते 375 कोयला कामगारों की जलसमाधि हो जाती है।ऑनलाइन फ़िल्म स्ट्रीमिंग सेवाएं

यह घटना हुई थी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) कोलियरीज डिविजन की चासनाला कोलियरी के डीप माइंस खान में। आज इस घटना में जान गंवाने वाले खनिकों की 50वीं बरसी है। दिल दहला देने वाले इस हादसे का याद कर आज भी लोग सहम उठते हैं। खान दुर्घटना के बाद कई मां की गोद सुनी हो गयीं। कई सुहागिनों की मांग का सिंदूर उजड़ गया। कई बहनों के भाई शहीद हो गए। कइयों के सिर से पिता का साया पल भर में ही उठ गया था।

भारत के इतिहास के सबसे बड़ी खान दुर्घटना

भारत के इतिहास के सबसे बड़ी खान दुर्घटना धनबाद से 20 किलोमीटर दूर चासनाला में घटी थी। चासनाला कोलियरी केपिट संख्या 1 और 2 के ठीक ऊपर स्थित एक बड़े जलागार (तलाब) में जमा करीब पांच करोड़ गैलन पानी खदान की छत को तोड़ता हुआ भीतर प्रवेश कर गया। इस प्रलयकालीन बाढ़ में वहां काम कर रहे खनिक फंस गए। आनन-फानन में मंगाए गए पानी निकालने वाले पम्प छोटे पड़ गए। कलकत्ता स्थित विभिन्न प्राइवेट कंपनियों से संपर्क साधा गया। तब तक काफी समय बीत गया था। खदान के भीतर फंसे लोगों को निकाला नहीं जा सका। कंपनी प्रबंधक ने नोटिस बोर्ड में मारे गए लोगों की लिस्ट लगा दी।

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घटना के वक्त चंड़ीगढ़ में चल रहा था कांग्रेस का अधिवेशन

उस समय केन्द्र और राज्य दोनों में कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी। घटना के वक्त चंडीगढ़ में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र, खान मंत्री चंद्रदीप यादव, श्रम मंत्री रघुनाथ राव आदि उपस्थित थे। खान दुर्घटना की बात आग के तरह फैली। तब के देश, विदेशों के अखबारांे व समाचार तंत्रो ने प्रश्नों की बोछार कर दी। इधर, चासनाला खान हादसे के बाद हिंसा की आंशका को देखते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक तारकेश्वर प्रसाद सिन्हा तथा उपायुक्त लक्ष्म्ण शुक्ला ने स्वंय कानून व्यवस्था की कमान संभाल ली थी और कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।

जांच में अफसरों की लापरवाही आई थी सामने

जांच में सामने आया कि दुर्घटना खदान के अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा था। खदान में रिसनेवाले पानी को जमा करने को यहां एक बांध बनाया गया था। हिदायत भी दी गई थी की बांध की 60 मीटर की परिधि में ब्लास्टिंग ना की जाए, परंतु अधिकारियों ने कोयला उत्पादन के चक्कर में हिदायतों को नजरअंदाज कर दिया और हैवी ब्लास्टिंग कर दी। इस कारण 375 खनिकों की जल समाधि हो गई। दुर्घटना के बाद महीनों तक खदान से पानी निकालने का कार्य हुआ। इसमें पोलैंड, रूस के वैज्ञानिकों से भारत सरकार ने मदद ली थी।

इस घटना पर बनी थी फिल्म ‘काला पत्थर’

इसी घटना को लेकर यश चोपड़ा द्वारा फिल्म काला पत्थर ( kala patthar) बनाई गई थी। यह फिल्म 9 अगस्त, 1979 को रिलीज हुई और जबरदस्त हिट हुई। इस फिल्म के मुख्य पात्र थे शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, शत्रुधन सिन्हा, संजीव कुमार, राखी, नीतू सिंह, परवीन बाॅबी, प्रेम चोपड़ा, प्रशिक्षित साहनी थे।

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