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कोरबा, 25 अप्रेल। दिल्ली हाई कोर्ट के इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) को राहत देने वाले फैसले से मोदी सरकार और भारतीय मजदूर संघ (BMS) को झटका लगा है।

यहां बताना होगा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इंटक को राहत देते हुए 2017 से लगा प्रतिबंध समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने श्रम मंत्रालय के चार जनवरी 2017 के आदेश को निष्प्रभावी करार दिया और केंद्र सरकार को आठ सप्ताह में इसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि डा. संजीव रेड्डी गुट ही असली इंटक है।

इंटक के नेतृत्व को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में चले हा रहे प्रकरण के कारण कांग्रेस से जुड़े इस श्रमिक संगठन को कई पब्लिक सेक्टर की समितियों से किनारे कर दिया गया था।

दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से कोल इंडिया की जेबीसीसीआई सहित सभी द्विपक्षीय-त्रिपक्षीय सरकारी समितियों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इंटक की वापसी का रास्ता साफ हो गया है।

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दूसरी ओर मोदी सरकार और भारतीय मजदूर संघ को इस फैसले से झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट में नेतृत्व को लेकर प्रकरण होने का बहाना बनाकर कई सरकारी समितियों से इंटक को दूर रखा गया था। भारतीय मजदूर संघ भी नहीं चाहता था कि इंटक को सरकारी समितियों में स्थान मिले।

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