कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) देश में कोयले के आयात को कम करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है है। कंपनी चाहती है कि भारत को बाहर से कम से कम कोयला मंगवाना पड़े और अपनी जरूरतें ज्यादातर घरेलू उत्पादन से ही पूरी हो जाए। इसके लिए सीआईएल ने अगले 10 साल का एक रोडमैप तैयार करने की योजना बनाई है, जिसमें करीब 24.3 करोड़ टन कोयला आयात कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का मुख्य फोकस तीन चीजों पर घरेलू उत्पादन बढ़ाना, कोयले की गुणवत्ता सुधारना और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत (लॉजिस्टिक्स) को संतुलित करने पर होगा।
वर्तमान में कई बार ऐसा होता है कि देश में कोयला उपलब्ध होने के बावजूद कंपनियां बाहर से आयात करती हैं, क्योंकि लॉजिस्टिक खर्च या गुणवत्ता की वजह से आयात सस्ता या आसान पड़ता है। अब सीआईएल इस स्थिति को बदलना चाहती है।
सुधार की जरूरतों पर रहेगा ध्यान
इसके तहत एक खास कदम “फोरेंसिक ऑडिट” होगा, जिसका मतलब है कि यह बारीकी से जांच की जाएगी कि आखिर किन-किन सेक्टर में और क्यों कोयले का आयात हो रहा है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कहां सुधार की जरूरत है। इसके बाद सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग नीतियां बनाई जाएंगी, ताकि स्थानीय स्तर पर कोयले की सप्लाई बढ़ाई जा सके और आयात की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो।
कोयले की गुणवत्ता पर फोकस
एक और महत्वपूर्ण पहल नेशनल वॉशरी एंड लॉजिस्टिक्स ग्रिड बनाने की भी है। इसका मतलब है कि कोयले की सफाई (वॉशिंग) और उसके परिवहन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा। इससे कोयले की गुणवत्ता सुधरेगी और सप्लाई में आने वाली रुकावटें कम होंगी।
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