Monday, October 12, 2026
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NCWA- XII पर संकट! हाईकोर्ट का मामला और लेबर कोड्स क्या रोक देंगे JBCCI- XII का गठन?

NCWA-XI लागू होने के बाद Coal India के कुछ Executive अधिकारियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में याचिका दायर की थी

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कोरबा, 6 जुलाई (Industrial Punch Desk): Coal India Limited (CIL) के राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता- XI (NCWA- XI) की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो चुकी है। अब देश के करीब 2.8 लाख गैर-कार्यकारी (Non-Executive) कर्मचारियों की नजर अगले वेतन समझौते NCWA- XII पर टिकी है, लेकिन इस बार वेतन वार्ता शुरू होने से पहले ही JBCCI- XII (Joint Bipartite Committee for Coal Industry) के गठन पर कानूनी और नीतिगत सवाल खड़े हो गए हैं।

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एक ओर Industrial Relations Code, 2020 (लेबर कोड्स) लागू होने की प्रक्रिया है, वहीं दूसरी ओर जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित वेतन संरचना (Pay Relativity) से जुड़ा मामला भी भविष्य की वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या कोयला मंत्रालय समय पर JBCCI-XII के गठन को मंजूरी देगा?

यूनियनों ने तेज किया दबाव

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ट्रेड यूनियनों ने JBCCI- XII के गठन की मांग को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि समिति का गठन जल्द नहीं हुआ तो NCWA- XII की वेतन वार्ता समय पर शुरू नहीं हो सकेगी और लाखों कर्मचारियों को एक बार फिर वेतन संशोधन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

यहां बताना होगा कि JBCCI- XI का गठन मई 2021 में हुआ था और उसी समिति ने लंबी वार्ता के बाद 20 मई 2023 को NCWA-XI समझौते को अंतिम रूप दिया था। हालांकि इस बार अभी तक JBCCI-XII के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

क्या है JBCCI?

JBCCI (Joint Bipartite Committee for Coal Industry) वह संयुक्त समिति है जिसमें Coal India प्रबंधन और केंद्रीय ट्रेड यूनियनें शामिल होती हैं। यही समिति NCWA (National Coal Wage Agreement) के तहत गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों पर समझौता करती है।

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हाईकोर्ट विवाद क्यों बना अहम?

NCWA-XI लागू होने के बाद Coal India के कुछ Executive अधिकारियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि संशोधित वेतन संरचना में कुछ उच्च श्रेणी के Non-Executive कर्मचारियों का वेतन शुरुआती Executive ग्रेड से अधिक हो गया है, जो Department of Public Enterprises (DPE) के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

क्या हुआ अदालत में?

वर्ष 2023 में हाईकोर्ट की Single Bench ने NCWA-XI की मंजूरी को निरस्त करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए भेज दिया था। इससे लगभग 2.82 लाख कर्मचारियों के वेतन संशोधन पर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।

इसके बाद Coal India ने Division Bench में अपील की। Division Bench ने Single Bench के आदेश पर स्टे दे दिया, जिसके कारण NCWA-XI के तहत वेतन भुगतान और समझौते का संचालन जारी रहा। अदालत ने माना कि तत्काल आदेश लागू होने से औद्योगिक अशांति और वेतन भुगतान में गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

वेतन अंतर बना सबसे बड़ा मुद्दा

अधिकारियों के संगठन चाहते हैं कि Executive और Non-Executive कर्मचारियों के बीच वेतन संरचना का अंतर (Pay Relativity) बना रहे। वहीं ट्रेड यूनियनें NCWA-XI के तहत कर्मचारियों को मिले लाभों में किसी प्रकार की कटौती या बदलाव का विरोध कर रही हैं।

यही विवाद भविष्य में JBCCI-XII की वेतन वार्ताओं का सबसे संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, विशेषकर तब जब Executive Pay Revision की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।

लेबर कोड्स भी बढ़ा सकते हैं चुनौती

श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Industrial Relations Code, 2020 के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ती है, तो Coal India में वेतन समझौते की प्रक्रिया और प्रतिनिधित्व व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से JBCCI-XII के गठन को लेकर कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

क्या समय पर होगा JBCCI-XII का गठन ?

यदि कोयला मंत्रालय और Coal India प्रबंधन मौजूदा कानूनी विवाद और लेबर कोड्स से जुड़े मुद्दों के बावजूद समय पर JBCCI-XII का गठन कर देते हैं, तो NCWA-XII की वेतन वार्ता वर्ष 2026 में शुरू हो सकती है।

हालांकि पिछली वेतन वार्ताओं का इतिहास बताता है कि समझौते में अक्सर लंबी देरी हुई है और बाद में एरियर के साथ वेतन संशोधन लागू करना पड़ा है।

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Industrial Punch Analysis

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि क्या कोयला मंत्रालय JBCCI-XII के गठन को हरी झंडी देगा, या फिर हाईकोर्ट में लंबित मामला और लेबर कोड्स की जटिलताएं नए वेतन समझौते की प्रक्रिया को एक बार फिर लंबा खींच देंगी? आने वाले दिनों में Coal India के लगभग 2.8 लाख गैर-कार्यकारी कर्मचारियों की नजर इसी फैसले पर टिकी रहेगी।

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