नई दिल्ली | Industrial Punch : देश में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन बीमा (Motor Insurance) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने आदेश दिया है कि अब नई निजी कार खरीदने पर 4 वर्ष और नई दोपहिया (बाइक) खरीदने पर 6 वर्ष का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस (Third Party Insurance) अनिवार्य होगा।
इससे पहले 2018 के आदेश के तहत नई कारों के लिए 3 वर्ष और नई बाइकों के लिए 5 वर्ष का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य था। अदालत ने माना कि पूर्व व्यवस्था के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़क पर चल रहे हैं, जिससे दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा मिलने में कठिनाई होती है।
56% वाहन बिना वैध बीमा के
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहनों के पास वैध इंश्योरेंस नहीं है। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।
बिना इंश्योरेंस गाड़ियों पर होगा ई-चालान
कोर्ट ने निर्देश दिया कि ANPR (Automatic Number Plate Recognition) कैमरों को VAHAN पोर्टल और Insurance Information Bureau (IIB) के डेटाबेस से जोड़ा जाए। इससे बिना बीमा वाले वाहनों की स्वतः पहचान कर ई-चालान जारी किया जा सकेगा।
इसके अलावा राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल डिवाइस और ऐप उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिनसे मौके पर ही वाहन के बीमा की जांच की जा सके।
बिना इंश्योरेंस वाहन को पेट्रोल देने पर भी रोक की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत भविष्य में बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल देने पर रोक लगाने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
साथ ही आम नागरिकों के लिए किसी भी वाहन का इंश्योरेंस स्टेटस ऑनलाइन जांचने की सुविधा विकसित करने का भी निर्देश दिया गया है।
इंश्योरेंस खरीदने से पहले मिलेगी पूरी जानकारी
अदालत ने IRDAI को चार-स्तरीय बीमा व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, पर्सनल एक्सीडेंट कवर, पिलियन/यात्री कवर, ओन डैमेज कवर जैसे विकल्प शामिल होंगे। साथ ही बीमा खरीदने से पहले ग्राहकों को सरल भाषा में सभी शर्तों और विकल्पों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य होगा।
14 अगस्त तक मांगी अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों—IRDAI, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय—को 14 अगस्त 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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