नई दिल्ली | IndustrialPunch : भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार की हिस्सेदारी और कम किए जाने की संभावनाओं को लेकर कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है। विभिन्न कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार चरणबद्ध तरीके से LIC में अपनी हिस्सेदारी घटा रही है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की इस सबसे बड़ी बीमा कंपनी की स्वायत्तता और सामाजिक भूमिका प्रभावित हो सकती है।
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इसी मुद्दे को लेकर 5 अगस्त को देशभर में विरोध प्रदर्शन और धरना आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को LIC में हिस्सेदारी बिक्री की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और सार्वजनिक क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान को कमजोर करने वाले किसी भी कदम से बचना चाहिए।
कर्मचारी संगठनों ने जताई चिंता
यूनियनों का कहना है कि LIC केवल एक बीमा कंपनी नहीं, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों के भरोसे और देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है। उनका आरोप है कि सरकार की हिस्सेदारी लगातार घटने से भविष्य में निजी निवेशकों का प्रभाव बढ़ सकता है, जिसका असर कर्मचारियों और पॉलिसीधारकों दोनों पर पड़ सकता है।
5 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन
कर्मचारी संगठनों ने घोषणा की है कि 5 अगस्त को देशभर के LIC कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान सरकार से हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया रोकने और LIC की सार्वजनिक क्षेत्र की पहचान बनाए रखने की मांग उठाई जाएगी।
यूनियनों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
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सरकार की रणनीति
केंद्र सरकार पहले ही LIC का IPO ला चुकी है और समय-समय पर न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी (Minimum Public Shareholding) के नियमों का पालन करने के लिए अपनी हिस्सेदारी कम करने की रणनीति पर काम कर रही है। कर्मचारी संगठन इसी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के कमजोर होने की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं।
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