Monday, October 12, 2026
Home Industrial (हिंदी) कोल WCL में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर हल्लाबोल! एक्स-रे विभाग निजी हाथों...

WCL में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर हल्लाबोल! एक्स-रे विभाग निजी हाथों में देने के खिलाफ 4 यूनियनें एकजुट

HMS नेता दिपू पिल्ले बोले—जब कंपनी के अस्पताल में सक्षम कर्मचारी मौजूद हैं तो निजी अस्पताल को एक्स-रे संचालन सौंपने का औचित्य क्या? संगठनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी

Advertisement

नागपुर। IndustrialPunch : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के उमरेड क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने के फैसले के खिलाफ गुरुवार को HMS, AITUC, CITU और INTUC से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से विरोध-प्रदर्शन किया। संगठनों ने क्षेत्र की नई एक्स-रे मशीन के संचालन का जिम्मा निजी अस्पताल आशा हॉस्पिटल को सौंपे जाने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया।

इसे भी पढ़ें: मुकेश चौधरी ने संभाली कमान, शुरू हुआ JBCCI-XII का मिशन! वेतन विवाद और कोर्ट केस पर CIL की बड़ी पहल

विरोध कर रहे श्रमिक संगठनों का आरोप है कि कंपनी के अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं और एक्स-रे टेक्निशियन के रूप में सक्षम कर्मचारी भी मौजूद हैं। इसके बावजूद एक्स-रे विभाग का संचालन निजी संस्था को सौंपना कर्मचारियों और मरीजों के हित में नहीं है।

‘कर्मचारी कम लागत में चला सकते हैं एक्स-रे विभाग’

Advertisement

नई एक्स-रे मशीन के संचालन के लिए आशा हॉस्पिटल को जिम्मेदारी सौंपे जाने के दौरान HMS के केंद्रीय पदाधिकारी दिपू पिल्ले ने विरोध दर्ज कराया।

उन्होंने कहा कि उमरेड क्षेत्र के कंपनी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हैं और कंपनी के अपने एक्स-रे टेक्निशियन इस कार्य को करने में सक्षम हैं। ऐसे में विभाग को निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं है।

उनका कहना था कि निजी अस्पताल को एक्स-रे विभाग के संचालन पर जितना खर्च किया जाएगा, उससे कम लागत में कंपनी के कर्मचारी ही इस व्यवस्था को संचालित कर सकते हैं।

‘स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण मरीजों के हित में नहीं’

श्रमिक संगठनों ने स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपे जाने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सीधे मरीजों से जुड़ा संवेदनशील विषय हैं। ऐसे विभागों का निजीकरण मरीजों के हितों और कंपनी कर्मचारियों की सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है। संगठनों ने प्रबंधन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

HMS, AITUC, CITU और INTUC से जुड़े नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो विरोध को और व्यापक किया जाएगा।

विरोध प्रदर्शन में HMS से दिपू पिल्ले और रामू भोयर, AITUC से महिंद्र नवांगे और दीपक भाटिया, CITU से संतोष साहू और फैयाज, तथा INTUC से रिजवान अंसारी और प्रदीप बोडे सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें: कोल इंडिया का कर्मचारियों को बड़ा तोहफा! अयोध्या-काशी में Holiday Home, 3 दिन तक कर सकेंगे ठहराव

BMS की भूमिका पर भी उठाए सवाल

विरोध के दौरान संगठनों की ओर से भारतीय मजदूर संघ (BMS) की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारी संगठनों ने आरोप लगाया कि BMS इस मुद्दे पर उनके विरोध में शामिल नहीं हुआ और उसके रवैये को निजीकरण के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

  • Join the IndustrialPunch WhatsApp Group:Click here
  • industrial punch is now on Whatsapp Channels. Click here to join
Advertisement
1 अक्टूबर से बदलेंगे ये जरूरी नियम, आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर 1 अक्टूबर से बदलेंगे ये जरूरी नियम, आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर कोल इंडिया की 10 मेगा माइंस ने Q1 में बनाया रिकॉर्ड, SECL, NCL और MCL की खदानों का दबदबा भारत के सर्वाधिक कोयला भंडार वाले सात राज्यों के बारे में जानें: वित्तीय वर्ष 2025- 26 : कोल इंडिया लिमिटेड की टॉप- 10 खदान