कोरबा। IndustrialPunch : कोयला मजदूरों के वर्ष 2026 के परफॉर्मेंस लिंक्ड रिवार्ड (PLR) की ₹1,10,250 राशि को लेकर चल रही बहस के बीच हिंद खदान मजदूर फेडरेशन (HMS) के सहायक महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने बोनस की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के आंकड़े सामने रखते हुए आलोचना करने वाले श्रम संगठनों और नेताओं पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि बोनस की राशि को कम बताने की मुहिम चलाने वालों को पहले यह देखना चाहिए कि जब उनके नेतृत्व में बोनस तय होता था, तब उत्पादन और बोनस वृद्धि का अनुपात क्या रहा था।
उस्मानी ने कहा कि कोल इंडिया में साल-दर-साल बोनस बढ़ता रहा है, लेकिन कई वर्षों में उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद PLR में अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि हुई। उनके मुताबिक 2026 में ₹1,10,250 का PLR मौजूदा परिस्थितियों में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उत्पादन घटा, फिर भी बोनस बढ़ा
अख्तर जावेद उस्मानी के अनुसार, 2020 में कोल इंडिया का उत्पादन 4.85 मिलियन टन कम हुआ था, इसके बावजूद बोनस में ₹3,800 की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2020-21 में उत्पादन में 5.918 मिलियन टन की कमी के बावजूद बोनस में ₹4,000 की वृद्धि हुई।
वहीं 2021-22 में उत्पादन में 26.414 मिलियन टन की बढ़ोतरी के बावजूद बोनस में वृद्धि ₹4,000 ही रही और PLR ₹72,500 से बढ़कर ₹76,500 हुआ।
उनके मुताबिक 2022-23 में उत्पादन में करीब 80 मिलियन टन यानी 11.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई और बोनस में ₹8,500 की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद 2023-24 में उत्पादन करीब 70 मिलियन टन बढ़ने के बावजूद बोनस में वृद्धि केवल ₹250 अधिक रही और राशि ₹93,750 तक पहुंची।
राष्ट्रीयकरण के बाद बोनस घटने नहीं दिया गया: उस्मानी
उस्मानी ने कहा कि कोल इंडिया के राष्ट्रीयकरण के बाद बोनस में लगातार बढ़ोतरी का इतिहास रहा है और बोनस घटकर मिलने का उदाहरण नहीं है। उन्होंने वर्ष 2008-09 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय बोनस में ₹1,650 की वृद्धि हुई थी, जो उनके अनुसार सबसे कम बढ़ोतरी में से एक थी, लेकिन राशि फिर भी बढ़ी थी।उन्होंने 2024-25 का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक उस वर्ष कोल इंडिया के उत्पादन में 7.40 मिलियन टन की बढ़ोतरी हुई, लेकिन बोनस ₹8,750 से केवल ₹9,250 यानी ₹500 बढ़ा।
उत्पादन और मुनाफे में गिरावट का दिया गया तर्क
उस्मानी के अनुसार 2025-26 में कोल इंडिया के उत्पादन में 12.86 प्रतिशत की गिरावट आई और कंपनी के लाभ में भी करीब ₹3,700 करोड़ की कमी हुई। उन्होंने इसे सरकारी नीतियों और प्रबंधन की कमियों से जोड़ते हुए कहा कि इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देकर प्रबंधन पिछले वर्ष के बराबर बोनस देने की स्थिति में था। हालांकि, उन्होंने कहा कि मैनपावर में कमी, बेहतर सेल रियलाइजेशन और यूनियन की बातचीत के कारण अंततः ₹1,10,250 का PLR हासिल किया जा सका।
हरभजन सिंह सिद्धू की भूमिका का उल्लेख
उस्मानी ने HMS के नेता हरभजन सिंह सिद्धू की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिद्धू विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, EPF के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी और अन्य संस्थागत मंचों पर अनुभव रखने वाले नेता हैं। उनके मुताबिक इसी अनुभव का लाभ PLR वार्ता में भी मिला। उस्मानी ने ₹1,10,250 के PLR को कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
अब नजर NCWA-XII की तैयारी पर
उस्मानी ने कहा कि कोयला मजदूरों की नजर अब 12वें वेतन समझौते (NCWA-XII) पर है। उन्होंने हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव के नेतृत्व में आगामी वेतन वार्ता को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने मजदूरों से NCWA-XII की तैयारी में जुटने और सम्मानजनक वेतन समझौते के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
- Join the IndustrialPunch WhatsApp Group:Click here
- industrial punch is now on Whatsapp Channels. Click here









