नई दिल्ली। IndustrialPunch : भारत में सोने के आयात को कम करने के लिए सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद सोने की तस्करी में भारी वृद्धि का दावा किया गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के दौरान तस्करी के जरिए भारत आने वाला सोना बढ़कर 50 टन हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 3 टन था। इस तरह तस्करी के जरिए आने वाले सोने में करीब 1500 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सोने के आयात पर निर्भर है भारत
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। घरेलू स्तर पर सोने का उत्पादन सीमित होने के कारण देश को अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करना पड़ता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष भारत ने लगभग 640 टन सोने का आयात किया था, जिसकी कुल कीमत 72.4 अरब डॉलर थी। सोने के आयात पर होने वाले विदेशी मुद्रा खर्च को कम करना सरकार की प्रमुख चिंताओं में शामिल रहा है।
इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% की गई
सोने के आयात को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने के उद्देश्य से सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी।
आयात शुल्क में इस बढ़ोतरी के बाद वैध माध्यम से सोना मंगाना महंगा हो गया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इसी अवधि के दौरान तस्करी के जरिए भारत आने वाले सोने में तेज उछाल की बात कही गई है।
सोने की कीमतों में अलग-अलग बाजारों में उतार-चढ़ाव
इस बीच घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला सोना कारोबार के दौरान 2,037 रुपये गिरकर 1,38,149 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
दूसरी ओर, सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। यहां 24 कैरेट सोना 270 रुपये महंगा होकर 1,39,640 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत में 250 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत में 200 रुपये की बढ़ोतरी हुई।
आयात शुल्क, तस्करी और कीमतों पर नजर
सोने पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी का उद्देश्य आधिकारिक आयात को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है, लेकिन तस्करी में कथित वृद्धि का आंकड़ा इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि आयात नीति, घरेलू मांग और अवैध कारोबार के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
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