Friday, May 1, 2026
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न्यू कोरबा हॉस्पिटल ने इलाज के शुल्क का नहीं है लगाया है डिस्प्ले बोर्ड, ताकि मरीजों का आर्थिक शोषण किया जा सके

दूसरी ओर यह भी बताया गया है कि न्यू कोरबा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज की अनावश्यक जांच भी की जाती है

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कोरबा, 27 अगस्त। छत्तीसगढ़ में निजी चिकित्सा लॉबी इस कदर हावी है कि नियम कायदों को ठेंगा दिखाए जाने के बावजूद शासन- प्रशासन इनके मालिकों के गिरेबां पर हाथ डालने की जहमत नहीं उठा पाता है। निजी अस्पताल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के नाम पर मरीजों का जमकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भी एक ऐसा ही निजी चिकित्सा संस्थान है, जो मनमाना शुल्क आरोपित किए जाने के लिए जाना जाता है।

यहां बात हो रही है न्यू कोरबा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (New Korba Sperspeciality Hospital) की। छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम (NURSING HOME RULES 2013) के कई मानकों को धता बताते हुए इस हॉस्पिटल का संचालन हो रहा है।

चुंकि न्यू कोरबा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सुविधाओं की उपलब्धता है, इस कारण बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं। मरीज के हॉस्पिटल में कदम रखते ही उसका आर्थिक शोषण शुरू हो जाता है। दरअसल अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीज और उसके परिजनों को इलाज के खर्चों को लेकर असमंजस में रखा जाता है।

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हॉस्पिटल प्रबंधन ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बना रखी है जिससे मरीज व परिजनों को इलाज के शुल्क के बारे में पता चल सके। कायदे से रिसेप्शन एरिया में चिकित्सक के परामर्श शुल्क सहित अन्य जांच इत्यादि की दर संबंधी सूची का बोर्ड लगाया जाना चाहिए। ताकि मरीज इलाज शुरू होने से पहले होने वाले खर्चे का अनुमान लगा सके। शुल्क की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने के कारण मरीज आर्थिक शोषण का शिकार हो जाता है।

दूसरी ओर यह भी बताया गया है कि न्यू कोरबा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज की अनावश्यक जांच भी की जाती है, ताकि अच्छी खासी बिलिंग की जा सके। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद भी मरीज को गुमराह कर उससे पैसे वसूल लिए जाते हैं।

यदि कोई व्यक्ति हॉस्पिटल प्रबंधन से शुल्क इत्यादि की जानकारी मांगता है तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उपभोक्ता फोरम में कुछेक मामले विचारधीन हैं।

जिला प्रशासन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में भी मनमाना शुल्क लेने, उचित इलाज नहीं करने आदि की जानकारी आती है, लेकिन कार्रवाई से हाथ कांपते हैं।

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