पुस्तक समीक्षा : कोयला खदान के हीरो और हीरों की कहानी  “आसमां में सुराख”

सर्वविदित इस बात की गारंटी है कि कोयला काला होता है। नजरिया अपना अपना। सकारात्मकता हो तो, वहां भी हीरा और हीरो दिखाई देते हैं। राष्ट्र को रौशन रखना है, उद्योग अस्पताल, रेल आदि चलते रहने के लिए, बिजली हेतु यह ज़रूरी है कि भंडार में पर्याप्त कोयला सदैव उपलब्ध रहे और,कोयला उत्पादन और प्रेषण का यह कार्य एकदम आसान नहीं है।

  • सत्येंद्र प्रसाद सिंह

सर्वविदित इस बात की गारंटी है कि कोयला काला होता है। नजरिया अपना अपना। सकारात्मकता हो तो, वहां भी हीरा और हीरो दिखाई देते हैं। राष्ट्र को रौशन रखना है, उद्योग अस्पताल, रेल आदि चलते रहने के लिए, बिजली हेतु यह ज़रूरी है कि भंडार में पर्याप्त कोयला सदैव उपलब्ध रहे और,कोयला उत्पादन और प्रेषण का यह कार्य एकदम आसान नहीं है।

इक्का दुक्का फिल्मों और प्रकाशित कतिपय संक्षिप्त रिपोर्टों से इसका वास्तविक अंदाज़ा लगाना संभव नहीं है। इसलिए, कोयला उद्योग और इसमें कार्यरत लोगों के बारे में स्थापित, प्रचलित परंपरागत अवधारणाओं में बदलाव लाज़िमी है।

इसे आसान कर दिया है श्री राजीव रंजन (मिश्र) ने। कोयला उद्योग में अपने जीवन के बहुमूल्य 38 वर्ष बिताने के बाद, प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर उन्होंने उसे लिपिबद्ध किया है। निश्चित तौर पर, पहली दफा किसी ने कोयला कर्मियों की मेहनत, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को दस्तावेजी स्वरूप दे कर उसे सम्मान दिया है “आसमां में सुराख” के रूप में। लेखक ने अपनी इस दूसरी पुस्तक में सरल, सहज शब्दों में गोया आंखों देखा हाल प्रस्तुत किया है जीवंत शब्द चित्र के रूप में।

अपने संवेदनशील रचनात्मक स्वभाव, टीम को साथ ले कर चलने और आउट ऑफ बॉक्स कार्य प्रणाली के लिए चर्चित और मशहूर शख्सियत श्री राजीव रंजन ने notionpress द्वारा प्रकाशित अपनी पुस्तक “आसमां में सुराख” में पूरी प्रामाणिकता से पेश किया है सजीव पात्रों और सच्ची घटनाओं को। amazon पर उपलब्ध आसमां में सुराख के पूर्व जनवरी 2021 में आई लेखक की पहली पुस्तक “असंभव संभव” ने भी अमेज़न की बेस्ट सेलर किताब होने का खिताब हासिल किया।

Rajiv Ranjan Mishra

350 रुपए वाली 260 पृष्ठों की आलोच्य पुस्तक आसमां में सुराख को पाठक पढ़ना शुरू करेंगे, तो खत्म कर के ही दम लेंगे, क्योंकि सुरेश भाऊ की बिटिया, तपती दुपहरी की शिफ्ट, निधु रानी की ज़िंदगी और देव की दुनिया जैसे इसके विविध अध्यायों में मानो आप पात्रों के साथ साथ यात्रा कर रहे होते हैं।

वरिष्ठ नौकरशाहों और कोयला उद्योग के दिग्गजों ने अपने उद्गारों से पुस्तक को और पुख़्ता पहचान दी है। आकर्षक कवर पेज पुस्तक के व्यक्तित्व से पूरी तरह मेल खाता है। अपने स्वभाव के अनुसार, प्रयोगधर्मी श्री राजीव रंजन शावेल ऑपरेटर मीनाक्षी कपूर,कार्मिक प्रबंधक विवेक कुमार सिंह, फोरमैन सुषमा दिनेश साथनकर, फिटर हेल्पर विनीता रामदास बरकड़े,लेखापाल मंगेश मुंदेकर,उप प्रबंधक (उत्खनन) रणजीत सिंह भाटी और टाइमकीपर रोहिणी प्रसाद तिवारी की लेखनी को भी पुस्तक में स्थान देकर उन्हें भी लेखकीय अहसास का भागीदार बनाने में सफ़ल रहे हैं।

लब्बोलुबाब यह कि आसमां में सुराख के जरिए लेखक श्री राजीव रंजन ने कोयला कर्मियों की गुमशुदा पहचान को विस्तृत फलक प्रदान किया है। इसीलिए,प्रस्तुत पुस्तक का चहुं ओर स्वागत किया जा रहा है।

आप भी इसे पढ़िएगा ज़रूर, अच्छा लगेगा आपको !

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