Tuesday, October 6, 2026
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‘पहले कर्मचारी हित, फिर आयोजन’, CCL डकरा में कर्मचारी प्रतिनिधियों का बड़ा विरोध

संगठन ने आवास, पेयजल, चिकित्सा, कार्यस्थल सुविधाओं, कल्याणकारी योजनाओं तथा रविवार/अवकाश ड्यूटी से जुड़े मुद्दों के समाधान की भी मांग की है।

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डकरा। IndustrialPunch: सेन्ट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के एन.के. क्षेत्र में 28 और 29 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली अंतर क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। संयुक्त सलाहकार समिति (ACC) और क्षेत्रीय कल्याण समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से कार्यक्रम का बहिष्कार करने की घोषणा की है।

संगठन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यह निर्णय सांस्कृतिक कार्यक्रम के विरोध में नहीं, बल्कि क्षेत्र प्रबंधन की एकतरफा कार्यप्रणाली, कर्मचारी प्रतिनिधियों की कथित उपेक्षा और कर्मचारियों के लंबित मुद्दों पर पर्याप्त संवाद नहीं होने के विरोध में लिया गया है।

13 जून के द्विपक्षीय समझौते का मुद्दा

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि 13 जून 2026 को ACC में हुए द्विपक्षीय समझौते के बावजूद रविवार एवं अवकाश दिवसों में ड्यूटी/तैनाती से जुड़े निर्णयों को लागू किया गया। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों में असंतोष और आर्थिक कठिनाइयों की स्थिति पैदा हुई है।

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समितियों की भूमिका पर उठाए सवाल

ACC एवं क्षेत्रीय कल्याण समिति के सदस्यों ने कहा कि कर्मचारी प्रतिनिधियों को केवल कार्यक्रमों में औपचारिक उपस्थिति के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारी हितों से जुड़े निर्णयों में प्रभावी भागीदारी के लिए शामिल किया जाना चाहिए।

संगठन ने आवास, पेयजल, चिकित्सा, कार्यस्थल सुविधाओं, कल्याणकारी योजनाओं तथा रविवार/अवकाश ड्यूटी से जुड़े मुद्दों के समाधान की भी मांग की है।

प्रबंधन के सामने रखी गई प्रमुख मांगें

  • ACC और क्षेत्रीय कल्याण समिति को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी दी जाए।
  • 13 जून 2026 के द्विपक्षीय समझौते की भावना के अनुरूप कार्रवाई की जाए।
  • रविवार एवं PH/PHD ड्यूटी को लेकर कर्मचारी प्रतिनिधियों से दोबारा चर्चा की जाए।
  • लंबित कर्मचारी समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए।
  • कर्मचारी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में एकतरफा निर्णय के बजाय संस्थागत संवाद सुनिश्चित किया जाए।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि बहिष्कार को लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक विरोध के रूप में देखा जाना चाहिए। उसका संदेश है—“पहले संवाद और सम्मान, फिर सहभागिता; पहले कर्मचारी हित, फिर औपचारिक आयोजन।”

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