कोरबा, 9 जुलाई (IndustrialPunch Desk) : कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (CMPF) पर 7.6 प्रतिशत ब्याज दर लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश 8 जुलाई 2026 को जारी किया गया, जबकि इससे पहले 3 जुलाई को वाराणसी में आयोजित CMPFO के न्यासी बोर्ड (Board of Trustees) की 186वीं बैठक में इस प्रस्ताव का कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने जोरदार विरोध किया था।
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CMPFO द्वारा जारी पत्र के अनुसार, भारत सरकार के कोयला मंत्रालय ने 30 जून 2026 के पत्र के माध्यम से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.6 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दी थी। इसके बाद CMPFO ने सभी बोर्ड सदस्यों को पत्र भेजकर प्रत्येक सदस्य के खाते में 7.6 प्रतिशत ब्याज जमा करने की सूचना दी है।
BOT बैठक में क्या हुआ था?
वाराणसी में आयोजित 186वीं बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर को 7.7 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया था। कर्मचारी संगठनों और विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और स्पष्ट कहा कि कर्मचारियों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक के दौरान यह भी कहा गया था कि कोयला सचिव इस विषय पर वित्त मंत्रालय से चर्चा करेंगे, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उस समय यह माना जा रहा था कि ब्याज दर पर अंतिम फैसला बाद में होगा, लेकिन अब 8 जुलाई को जारी आदेश ने इस पूरे घटनाक्रम पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारी संगठनों में नाराजगी
आदेश जारी होने के बाद कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के बीच असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि BOT बैठक में उठाई गई आपत्तियों और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
संगठनों का आरोप है कि CMPFO में लंबे समय से पारदर्शिता का अभाव बना हुआ है। उनका कहना है कि :
- CMPFO की वेबसाइट समय पर अपडेट नहीं होती।
- वार्षिक (Annual Report) और मासिक (Monthly Report) नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती।
- पेंशनरों की वास्तविक संख्या और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।
- तीन वर्षों से ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वेबसाइट की स्थिति आज भी संतोषजनक नहीं है।
उठ रहे हैं कई सवाल
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि BOT बैठक में ब्याज दर को लेकर व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था और मामला आगे विचार के लिए छोड़ा गया था, तो फिर 7.6 प्रतिशत ब्याज दर का आदेश इतनी जल्दी कैसे जारी कर दिया गया? इसे लेकर संगठन अब बोर्ड के सदस्य प्रतिनिधियों से भी सक्रिय भूमिका निभाने की मांग कर रहे हैं।
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Industrial Punch Analysis
CMPFO देश के लाखों कोयला कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की भविष्य निधि का प्रबंधन करता है। ऐसे में ब्याज दर, पारदर्शिता और डिजिटल सेवाओं से जुड़े मुद्दे सीधे कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़े हैं। 7.6 प्रतिशत ब्याज दर के आदेश के बाद अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि कर्मचारी संगठनों और BOT सदस्य इस विषय पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

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