Korba (IndustrialPunch Desk) : देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा आधार कोयला है। बिजली उत्पादन से लेकर इस्पात और सीमेंट उद्योग तक इसकी अहम भूमिका है, लेकिन जिस कोयले से देश का विकास होता है, उसी कोयले के इर्द-गिर्द वर्षों से एक समानांतर अवैध कारोबार भी पनपता रहा है। इसे आम तौर पर “कोयला चोरी” कहा जाता है, जबकि इसके पीछे कई स्तरों पर संगठित गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
पहला चरण: अवैध खनन कैसे होता है?
जब किसी खदान का संचालन बंद हो जाता है या पुराने खनन क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती, तो कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर अवैध उत्खनन की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों में लोग छोटे औजारों या अस्थायी सुरंगों के माध्यम से कोयला निकालने का प्रयास करते हैं।
इस तरह का उत्खनन बेहद जोखिम भरा होता है। बिना वैज्ञानिक पद्धति और सुरक्षा उपायों के की गई खुदाई से सुरंग धंसने, गैस भरने और जानलेवा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
दूसरा चरण: बंद खदानों से चोरी
कई क्षेत्रों में बंद या परित्यक्त खदानें अपराधियों के निशाने पर रहती हैं। यदि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो, तो रात के समय चोरी-छिपे कोयला निकाला जाता है।
कुछ मामलों में कोयला साइकिल, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर-ट्रॉली या छोटे वाहनों से निकाला जाता है और बाद में बड़े वाहनों के माध्यम से आगे भेजा जाता है। कई बार यह अवैध कोयला स्थानीय बाजारों या छोटे औद्योगिक उपभोक्ताओं तक पहुंचने की कोशिश करता है।
तीसरा चरण: रेलवे रैक से चोरी
रेलवे के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयले का परिवहन होता है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समय-समय पर ऐसे मामलों का खुलासा किया गया है, जिनमें चलती या खड़ी मालगाड़ियों से कोयला चोरी करने के प्रयास हुए।
इन मामलों में आम तौर पर रैक रुकने के दौरान कोयला उतारने की कोशिश, वैगनों से कोयला गिराकर बाद में एकत्र करना, परिवहन मार्ग पर चोरी की घटनाएं जैसे तरीके सामने आए हैं। हालांकि, रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां नियमित निगरानी, गश्त और तकनीकी उपायों से ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने का प्रयास करती हैं।
चौथा चरण: ट्रकों से कोयला कैसे गायब होता है?
कोयला परिवहन के दौरान भी अनियमितताओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियों और कंपनियों द्वारा विभिन्न मामलों में निम्नलिखित तरीके चिन्हित किए गए हैं:
- रास्ते में वाहन रोककर कुछ मात्रा में कोयला उतार देना।
- लोड में छेड़छाड़ कर कम वजन पहुंचाना।
- फर्जी दस्तावेजों या परिवहन रिकॉर्ड में हेरफेर का प्रयास।
- वैध और अवैध कोयले को मिलाकर आगे भेजना।
ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए कई कंपनियों ने GPS, RFID, इलेक्ट्रॉनिक वेटब्रिज और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी प्रणालियां लागू की हैं।
पांचवां चरण: माफिया नेटवर्क कैसे काम करता है?
जांच एजेंसियों द्वारा उजागर किए गए कई मामलों में यह पाया गया कि कोयला चोरी केवल एक व्यक्ति का काम नहीं होती। इसमें अलग- अलग भूमिकाएं निभाने वाले लोग शामिल हो सकते हैं, जैसे:
- अवैध उत्खनन करने वाले
- परिवहन की व्यवस्था करने वाले
- खरीद-बिक्री कराने वाले
- फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले
- अवैध भंडारण करने वाले
हालांकि, हर मामला अलग होता है और किसी भी व्यक्ति या समूह की भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाता है।
रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
कोयला कंपनियां, रेलवे, राज्य पुलिस और अन्य एजेंसियां समय-समय पर विभिन्न उपाय अपनाती हैं, जिनमें शामिल हैं:
- संवेदनशील क्षेत्रों में CCTV और ड्रोन निगरानी
- GPS आधारित वाहन ट्रैकिंग
- RFID टैगिंग
- डिजिटल डिस्पैच प्रणाली
- संयुक्त छापेमारी
- अवैध डिपो पर कार्रवाई
- सुरक्षा बलों की नियमित गश्त
इन उपायों का उद्देश्य चोरी की घटनाओं को कम करना और वैध आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निष्कर्ष
कोयला चोरी केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है। इससे सरकारी राजस्व, उद्योगों की आपूर्ति, श्रमिकों की सुरक्षा और स्थानीय कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। अवैध खनन से होने वाली दुर्घटनाएं कई परिवारों को प्रभावित करती हैं, जबकि संगठित चोरी उद्योग की विश्वसनीयता और संसाधनों के प्रबंधन पर भी प्रश्न खड़े करती है।
नोट: यह रिपोर्ट कोयला क्षेत्र में विभिन्न वर्षों में सामने आए मामलों, प्रशासनिक कार्रवाई, मीडिया रिपोर्टों और सामान्य तौर पर देखे गए तरीकों का विश्लेषण है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि अपराध की कार्यप्रणाली को समझाना है।
Coal Crime Files की अगली कड़ी में पढ़िए : Episode 2: “फर्जी परिवहन चालान और ई-परमिट का खेल– कागजों में कैसे बदल जाता है कोयले का सफर?”
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