Monday, February 16, 2026
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कोयला और खान मंत्रालय की सलाहकार समिति ने राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट के कामकाज की समीक्षा की

30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची के महत्व के बारे में श्री जोशी ने सदस्यों को बताया कि भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास चल रहे हैं।

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कोयला और खान मंत्रालय सलाहकार समिति की बैठक संसद भवन एनेक्सी में हुई। राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (National Mineral Exploration Trust) के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा करने वाली समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि केन्द्र खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देने और भारत को खनिज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकारों को पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। भारत के लिए हाल ही में जारी 30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची के महत्व के बारे में श्री जोशी ने सदस्यों को बताया कि भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास चल रहे हैं।

बैठक का एजेंडा “देश में अन्वेषण को प्रोत्साहित करने में एनएमईटी की भूमिका और जिम्मेदारी की तुलना में इसका प्रदर्शन” था। सचिव वी.एल.कांता राव के नेतृत्व में खान मंत्रालय की टीम ने समिति के समक्ष एनएमईटी के प्रदर्शन पर एक प्रस्तुति दी। सदस्यों को बताया गया कि परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अत्यधिक गहरे और महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण के लिए प्रोत्साहन के रूप में घोषित किया गया है।

यह बताया गया कि खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए एनएमईटी ने विभिन्न अधिसूचित अन्वेषण एजेंसियों और अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों (एनईए और एनपीईए) द्वारा देश के विभिन्न भागों में क्षेत्रीय और विस्तृत अन्वेषण के लिए 2100.14 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 309 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 309 अनुमोदित परियोजनाओं में से 151 परियोजनाएं अब तक पूरी हो चुकी हैं। शेष प्रगति पर हैं। संबंधित राज्य सरकारों द्वारा 11 ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई है, जिससे खान के जीवनकाल में देश को 1.69 लाख करोड़ रुपये का (लगभग) राजस्व प्राप्त हुआ है।

खनिज अन्वेषण परियोजनाओं के अतिरिक्त, एनएमईटी बेसलाइन नेशनल एरो जियोफिजिकल मैपिंग कार्यक्रम(एनएजीएमपी) के अंतर्गत मल्टी सेंसर एरो जियोफिजिकल सर्वेक्षण, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के नेशनल जियोफिजिकल मैपिंग कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य उच्च रिजॉल्यूशन बेसलाइन डाटा प्राप्त करना है जो आगे खनिज अन्वेषण के लिए छिपे हुए और गहरे लक्ष्य क्षेत्रों की पहचान में सहायक होगा। एनएमईटी, नेशनल जियो सांइस डाटा रिपोजिटरी(एनजीडीआर) पोर्टल के विकास के लिए भी वित्त पोषण कर रहा है।

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इसके अलावा, अब तक 16 निजी अन्वेषण एजेंसियों को अधिसूचित किया गया है और एनएमईटी ने पांच अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों को 7.60 करोड़ रुपये की 11 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन 11 परियोजनाओं में से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए 5.07 करोड़ रुपये की 5 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

एनएमईटी ने तकनीकी अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार के संगठनों और राज्य डीजीएम/डीएमजी में मशीनरी/उपस्कर/उपकरणों की खरीद/मौजूदा सॉफ्टवेयर और अन्य नवीनतम प्रौद्योगिकी और उपकरणों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए स्कीमें तैयार और परिचालित की हैं। इस योजना के तहत 19 राज्यों, जीएसआई और आईबीएम को स्वीकृत कुल राशि 182.52 करोड़ रुपये है और 23.78 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

एनएमईटी नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए राज्यों के डीजीएम/डीएमजी को प्रोत्साहनों का वित्त पोषण कर रहा है। एनएमईटी ने नीलामी योग्य ब्लॉक और सफलतापूर्वक नीलामी किए गए ब्लॉकों की उपलब्धता के लिए 20 राज्यों को 37.34 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।

सलाहकार समिति के सदस्यों ने मंत्रालय की सराहना की और खनिज अन्वेषण बढ़ाने के लिए विभिन्न सुझाव दिए तथा एनएमईटी की उपलब्धियों की सराहना की। सदस्यों ने खनिज क्षेत्र, विशेष रूप से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खान मंत्रालय द्वारा उठाए जा रहे कदमों की सराहना की।

इस अवसर पर उपस्थित सांसदों में अजय कुमार मंडल, चुन्नी लाल साहू, कृपाल बालाजी तुमाने, मितेश रमेशभाई पटेल,  मोहन मांडवी, पकौरी लाल, सुनील सोरेन, सुरेश कुमार पुजारी, खीरू महतो, श्रीमती सीमा द्विवेदी और डॉ प्रशांत नंदा शामिल थे।

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