Tuesday, July 21, 2026
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पहली तिमाही में CSPGCL का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर, लक्ष्य से 10.46% पीछे रहा राज्य का विद्युत उत्पादन

अप्रैल-जून 2026 में 5,147 GWh के लक्ष्य के मुकाबले 4,608.52 GWh उत्पादन, औसत PLF 74.30% दर्ज

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कोरबा, 9 जुलाई (IndustrialPunch Desk) : छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) के ताप विद्युत संयंत्रों का वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में प्रदर्शन निर्धारित लक्ष्य की तुलना में कमजोर रहा।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के ताप विद्युत संयंत्र निर्धारित उत्पादन लक्ष्य का 89.54% ही हासिल कर सके, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में प्रदर्शन में भी गिरावट दर्ज की गई।

CEA के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के दौरान CSPGCL के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए 5,147 मिलियन यूनिट (MU) उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले वास्तविक उत्पादन 4,608.52 मिलियन यूनिट रहा, जो लक्ष्य से 538.48 मिलियन यूनिट कम है। यह लक्ष्य का 89.54% है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले प्रदर्शन 94.54% रहा।

संयंत्रवार प्रदर्शन

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र (DSPM TPS) ने पहली तिमाही में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। संयंत्र ने 938 मिलियन यूनिट के लक्ष्य के मुकाबले 957.24 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन किया और लक्ष्य का 102.05% हासिल किया। संयंत्र का औसत PLF 87.66% रहा।

इसके विपरीत कोरबा पश्चिम ताप विद्युत गृह (Korba West TPS) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। संयंत्र ने 2,396 मिलियन यूनिट के लक्ष्य के मुकाबले 1,772.05 मिलियन यूनिट उत्पादन किया, जो लक्ष्य का केवल 73.96% है। इसका औसत PLF 60.55% दर्ज किया गया।

मड़वा ताप विद्युत परियोजना (Marwa TPS) ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 1,813 मिलियन यूनिट के लक्ष्य के मुकाबले 1,879.23 मिलियन यूनिट उत्पादन किया और लक्ष्य का 103.65% हासिल किया। परियोजना का औसत PLF 86.05% रहा।

Industrial Punch Analysis

पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि DSPM TPS और Marwa TPS ने लक्ष्य से अधिक उत्पादन कर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कोरबा पश्चिम ताप विद्युत गृह के कमजोर प्रदर्शन का सीधा असर CSPGCL के समग्र उत्पादन और PLF पर पड़ा। यदि आगामी तिमाहियों में कोरबा पश्चिम की उत्पादन क्षमता और मशीन उपलब्धता में सुधार नहीं होता है, तो वार्षिक उत्पादन लक्ष्य हासिल करना कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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