नई दिल्ली | Industrial Punch : केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के मकान किराया भत्ता (HRA) को लेकर बड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि यदि पति-पत्नी दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और दोनों एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, तथा उनमें से किसी एक को सरकारी आवास आवंटित किया गया है, तो परिवार को सरकारी आवास उपलब्ध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरे कर्मचारी को HRA देय नहीं होगा।
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सरकार ने बताया HRA का उद्देश्य
सरकार ने स्पष्ट किया कि HRA केवल उन कर्मचारियों को दिया जाता है जिन्हें सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है और जो किराये के मकान में रहने का वास्तविक खर्च वहन करते हैं। यदि परिवार पहले से सरकारी आवास में रह रहा है, तो दूसरे पति या पत्नी द्वारा अलग से आवास व्यय नहीं किया जा रहा है, इसलिए HRA का भुगतान नहीं किया जा सकता।
क्या सरकार के पास शिकायतें आईं?
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने कहा कि इस नीति पर पुनर्विचार के लिए सरकारी कर्मचारियों या कर्मचारी संगठनों से कोई अभ्यावेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
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नीति बदलने से भी इनकार
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि इस नीति की समीक्षा करने या इसमें बदलाव करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए वर्तमान व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।
यह जवाब राज्यसभा में लिखित प्रश्न संख्या 1831 के उत्तर में दिया गया, जिसमें सरकारी कर्मचारी दंपतियों के HRA नियमों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
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