भारत में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। देश के आयातित कोयले पर आधारित कई ताप विद्युत संयंत्र अब 50 प्रतिशत से अधिक घरेलू कोयले का उपयोग कर रहे हैं। यह बदलाव सरकार और Coal India Limited की उत्पादन एवं आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति का परिणाम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, 18.7 गीगावाट क्षमता वाले आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्रों में से लगभग 5.7 गीगावाट क्षमता पहले ही घरेलू कोयले पर संचालित हो रही है, जबकि अतिरिक्त 4.3 गीगावाट क्षमता पर भी परीक्षण जारी है। कुछ संयंत्रों में घरेलू कोयले का उपयोग 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
इस बदलाव का सीधा असर कोयला आयात पर पड़ा है। जनवरी से मई 2026 के दौरान भारत का तापीय कोयला आयात चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में आयात में और कमी आ सकती है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
उधर, कोल इंडिया लगातार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ाने पर काम कर रही है। कंपनी ने गैर-विनियमित (Non-Regulated Sector) उपभोक्ताओं के लिए 35 मिलियन टन कोयले की पेशकश की है, ताकि उद्योगों को पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो सके और आयातित कोयले पर निर्भरता कम हो।
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