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कोरबा, 14 अप्रेल। मानेसर और नोएडा के औ‌द्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुई श्रम अशांति की घटनाओं पर भारतीय मजूदर संघ (BMS) ने गंभीर चिंता जताई है। बीएमस के महासचिव सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने जारी बयान में कहा कि इन घटनाक्रमों को जिम्मेदारी, संतुलन और दीर्घकालिक औ‌द्योगिक स‌द्भाव के प्रति प्रतिबद्धता के साथ देखा जाना चाहिए।

सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि भारत का औ‌द्योगिक परिदृश्य विविधतापूर्ण है। विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में वेतन संरचना में भिन्नता आर्थिक स्थितियों, जीवन यापन की लागत और उत्पादकता स्तरों के अंतर का एक स्वाभाविक परिणाम है। इसलिए, पूरे देश में पूर्णतः समान वेतन संरचना का विचार न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से टिकाऊ।

हालांकि, यह स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वर्तमान अशांति श्रमिकों की वास्तविक चिंताओं को दर्शाती है। समान औ‌द्योगिक समूहों के भीतर वेतन विसंगतियां, बढ़ती जीवन लागत, अत्यधिक संविदाकरण और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की कमी जैसे मु‌द्दों ने असंतोष को जन्म दिया है। जब इन चिंताओं को नजरअंदाज किया जाता है या उनमें देरी की जाती है, तो वे अनिवार्य रूप से अशांति के रूप में प्रकट होती है।

भारतीय मजदूर संघ उन सभी गैर-जिम्मेदाराना कार्यों की कड़ी निंदा करता है जिन्होंने इस स्थिति को उत्पन्न करने, बढ़ाने या इसका फायदा उठाने में योगदान दिया है। ऐसे स्पष्ट संकेत हैं कि कुछ निहित स्वार्थों और बाहरी तत्वों ने श्रमिकों को गुमराह करने और व्यवधान पैदा करने का प्रयास किया है। ऐसे कार्य अनुशासित ट्रेड यूनियनवाद के लोकाचार के खिलाफ हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

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बीएमएस दोहराता है कि श्रमिकों की जायज मांगों को विघटनकारी ताकतों द्वारा अगवा नहीं किया जाना चाहिए। हिंसा, संपत्ति को नुकसान और औ‌द्योगिक अनुशासन का टूटना अंततः श्रमिकों के अपने हितों को नुकसान पहुंचाता है और श्रम न्याय के उद्देश्य को कमजोर करता है।

बीएमएस नेता ने कहा कि उ‌द्योगों को तत्काल सुधारात्मक उपाय करने चाहिए। उचित वेतन प्रथाओं को सुनिश्चित करना, अनुबंध श्रम पर अनुचित निर्भरता को कम करना और पारदर्शी एवं निरंतर संवाद तंत्र स्थापित करना आवश्यक है। औ‌द्योगिक संबंध केवल नियमों के पालन पर नहीं, बल्कि विश्वास पर आधारित होने चाहिए।

सरकार को संतुलन और दृढ़ता के साथ कार्य करना चाहिए। जहां हिंसा या उकसावे में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, वहीं उ‌द्योगों द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों, जिसमें श्रम कानूनों का पालन न करना और उचित लाभों से वंचित करना शामिल है, के समाधान में भी समान गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। सरकार को विवादों के बढ़ने से पहले उनके समाधान के लिए त्रिपक्षीय तंत्र को भी मजबूत करना चाहिए।

भारतीय मजदूर संघ सभी हितधारकों से जिम्मेदारी से कार्य करने का आह्वान करता है। औ‌द्योगिक शांति, श्रमिकों की गरिमा और राष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता आपस में जुड़े हुए हैं। किसी को भी संकीर्ण या निहित स्वार्थों के लिए इस संतुलन को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

तत्काल प्राथमिकता सामान्य स्थिति बहाल करने, रचनात्मक संवाद शुरू करने और ऐसी निवारण प्रणालियों को संस्थागत बनाने की होनी चाहिए जो पुनरावृत्ति को रोक सकें। श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए, लेकिन हमेशा अनुशासित, संगठित और रचनात्मक माध्यमों से।

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